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संपादकीय

यह अन्ना हजारे जैसा आंदोलन नहीं है

भारतीय राजनीति की एक पुरानी कमजोरी रही है—ऐतिहासिक दृष्टांतों और समानताओं का अत्यधिक प्रयोग। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा चलाए जा…
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फर्जी नैरेटिव का तेजी से घटता असर

लोकतंत्र में विचार-विमर्श और स्वस्थ विरोध प्रदर्शन को शासन-प्रशासन के संतुलन की मुख्य धुरी माना जाता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह…
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जनता का धैर्य और संवाद का संकट

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी जनता और उसका भावी भविष्य—यानी युवा—होते हैं। लेकिन जब यही युवा अपनी न्यायसंगत मांगों, निष्पक्ष परीक्षा…
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21 जुलाई, बंगाल की सियासत का महासमर

केवल एक तारीख नहीं, बल्कि सत्ता के संघर्ष, आंसुओं, संघर्ष और राजनीतिक वर्चस्व का एक जीवंत प्रतीक है। हर साल तृणमूल कांग्रेस इस दिन को शहीद…
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एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग.. .. .. ..

राजनीति को संभावनाओं का खेल कहा जाता है, लेकिन अक्सर यह बदलते स्टैंड और सुविधा के सिद्धांतों का मंच बन जाती है। जब नेता विपक्ष में होते हैं,…
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कॉर्पोरेट हित की क्रोनोलॉजी कौन बतायेगा

भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों से क्रोनोलॉजी (कालक्रम) शब्द काफी चर्चा में रहा है। जब भी देश में कोई बड़ी नीतिगत घोषणा…
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भारत की नई राजनीतिक पीढ़ी का क्रांतिकारी उदय

भारतीय राजनीतिक प्रतिष्ठान के भीतर दशकों से युवाओं के अस्तित्व को केवल भविष्य काल के चश्मे से ही देखा जाता रहा है। जनसभाओं और चुनावी…
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घोटालों के खिलाफ वोट देकर बड़े घोटालों में फंसे हैं

वर्ष 2014 में कांग्रेस को दिल्ली की सत्ता से बेदखल करने के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार था। भाजपा ने नरेंद्र मोदी को अपना चेहरा बनाकर…
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लोकतंत्र में अलगाव नहीं जुड़ाव चाहिए

आखिरकार वह कौन सा दस्तावेज़ या प्रमाण है जो यह अकाट्य रूप से सिद्ध करता है कि मैं अपने ही देश का नागरिक हूँ, मेरा संबंध मेरी अपनी मातृभूमि…
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वैश्विक मीडिया की नजर में भारतीय नेतृत्व

समकालीन वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। एक तरफ जहां देश आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं…
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मौन के साये में प्रधानमंत्री की वैश्विक छवि

लोकतंत्र की बुनियाद जनता के प्रति जवाबदेही और पारदर्शी संवाद पर टिकी होती है। इस संवाद का सबसे सशक्त माध्यम स्वतंत्र पत्रकारिता है, जहाँ…
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हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खाएगा.. .. .. ..

कहते हैं कि भक्ति में असीम शक्ति होती है, लेकिन यह शक्ति नोटों के बंडल देखकर इतनी चमत्कारी हो जाएगी, इसका अंदाजा शायद विधाता को भी नहीं था।…
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अपने ही नागरिकों को अविश्वास करता देश

ऐसा क्या है जो यह साबित करता है कि मैं अपने ही देश का हूँ? यदि यह केवल एक वैचारिक या दार्शनिक प्रश्न होता जिसे बुद्धिजीवी और दार्शनिक अपने…
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बंगाल, जनता का आक्रोश और दलबदलुओं की बेचैनी

पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से तीव्र संघर्षों, वैचारिक टकरावों और जन-आंदोलनों की भूमि रही है। परंतु, हालिया दिनों में राज्य के भीतर जो…
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राम मंदिर में चोरी आस्था के साथ विश्वासघात है

पूजनीय धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में भ्रष्टाचार निश्चित रूप से उन लोगों के नैतिक अधिकार को कमजोर करता है जो धर्म के नाम पर बात करने का…
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