सोशल मीडिया: जब हथियार बन जाए गले की फांस
बीते कुछ वर्षों में भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण हथियार बन गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल ने इस हथियार का बखूबी इस्तेमाल किया है, जिसका असर हम सबने देखा है। चाहे वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को गद्दी से हटाना हो या राहुल गांधी को पप्पू बनाना हो, भाजपा ने सोशल मीडिया का उपयोग अपनी छवि को चमकाने और विरोधियों को बदनाम करने के लिए किया है। यह अलग बात है कि डॉ मनमोहन सिंह के कोयला घोटाला में बेदाग साबित होने के बाद कोई उस विनोद राय को नहीं खोज रहा है, जिन्होंने इस घोटाला की बात को हवा दी थी।
बाद के कालखंड में यह भी साबित हो गया कि दरअसल विनोद राय किसके लिए काम कर रहे थे। लेकिन यह बात याद रखी गयी कि खुद डॉ सिंह ने अपने बारे में कहा था कि जब इतिहास उनके बारे में लिखेगा तो वह दयावान रहेगा। यह कथन सौ फीसद सच साबित हुआ है। खैर असली मुद्दे पर लौटते हैं तो हम पाते हैं कि हाल के दिनों में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जेन जीने सोशल मीडिया का इस्तेमाल भाजपा के प्रचार तंत्र के खिलाफ ही करना शुरू कर दिया है। जंतर मंतर पर चल रहा किसानों का आंदोलन इसका एक ज्वलंत उदाहरण है।
तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद, यह आंदोलन पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा का आईटी सेल देश में सबसे बड़ा और संगठित सोशल मीडिया विंग है। इस विंग का मुख्य काम भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को बढ़ावा देना और विरोधियों को निशाना बनाना है। आईटी सेल के सदस्य बड़ी संख्या में सोशल मीडिया अकाउंट्स चलाते हैं, जिनके जरिए वे भाजपा की नीतियों और कार्यक्रमों का प्रचार करते हैं। साथ ही, वे विरोधियों के खिलाफ भ्रामक सूचनाएं और गलत वीडियो भी फैलाते हैं।
इसका एक उदाहरण राहुल गांधी का वो वीडियो है, जिसमें वे कहते हैं कि एक तरफ से आलू डालेंगे, दूसरी तरफ से सोना निकलेगा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और भाजपा समर्थकों ने इसे राहुल गांधी की अज्ञानता का सबूत बताया था। लेकिन, बाद में यह बात सामने आई कि यह वीडियो फर्जी था और राहुल गांधी ने ऐसा कुछ नहीं कहा था। जेन जी, जो कि 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों का समूह है, सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है। वे भाजपा के प्रचार तंत्र के प्रति काफी आलोचनात्मक हैं।
वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाने और विरोध प्रदर्शनों को संगठित करने के लिए करते हैं। किसानों के आंदोलन में जेन जी की अहम भूमिका रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर किसानों के समर्थन में हैशटैग चलाए और आंदोलन से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने भाजपा सरकार के खिलाफ ऑनलाइन अभियान भी चलाए। जेन जी के उदय से सोशल मीडिया का चेहरा बदल रहा है। यह अब भाजपा के लिए सिर्फ एक हथियार नहीं रह गया है, बल्कि एक गले की फांस भी बन गया है।
जेन जी के सक्रिय होने से भाजपा का प्रचार तंत्र कमजोर हो गया है और विरोधियों को एक नया मंच मिल गया है। इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका भी अहम रही है। भाजपा समर्थक मीडिया घरानों ने सोशल मीडिया पर भाजपा के एजेंडे को बढ़ावा दिया है। लेकिन, जेन जी के उदय ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। जेन जी सोशल मीडिया पर स्वतंत्र रूप से जानकारी साझा कर रहे हैं और मीडिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया का भारतीय राजनीति पर क्या असर होगा, यह अभी कहना मुश्किल है। लेकिन, यह निश्चित है कि सोशल मीडिया अब एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। जेन जी के उदय से सोशल मीडिया और भी ज्यादा सक्रिय हो गया है और यह भविष्य में भारतीय राजनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लेकिन यह अब माना जा सकता है कि भाजपा ने जिस हथियार से सत्ता पर कब्जा करने और चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए इस्तेमाल किया था,वही हथियार अब उसके गले की फांस बन गया है।
दरअसल नई पीढ़ी के लोग बचपन से ही मोबाइल से इतने अभ्यस्त होते हैं कि तकनीक के इस्तेमाल को समझने में हर कोई उनके पीछे छूट जाता है। इसलिए प्रारंभिक प्रयासों के बाद भी जेन जी के आंदोलन ने पूरी सोशल मीडिया को ही अपनी बातों से भर दिया था, जिसमें भाजपा की आवाज दबकर रह गयी। अब भाजपा को इसी हथियार का डर सता रहा है। जिसका नतीजा है कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ होने वाली टिप्पणियों की जांच में दिल्ली की पुलिस जुटी हुई है।