यूपीआई लेनदेन पर शुल्क पर नेता प्रतिपक्ष ने खुलकर कहा
छह साल पहले राहुल गांधी ने कहा था
अब व्यापारी भी यह फीस वसूलेंगे ही
डिजिटल कारोबार की भी हवा निकली
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ करने का गंभीर आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह कदम सरकार का अमेरिकी दबाव के आगे आत्मसमर्पण करने का परिणाम है, जबकि मल्लिकार्जुन खडगे ने इसे जनता की लूट करार दिया है।
राहुल गांधी का आरोप है कि एक हालिया अधिसूचना के जरिए चुपचाप 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट थोपने की तैयारी कर ली गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में खडगे ने कहा कि यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं के नियम को बदलकर 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं कर दिया गया है। उन्होंने सवाल किया कि जब महंगाई पहले ही आम आदमी की बचत को निचोड़ चुकी है, तब सरकार जनता पर डिजिटल पेमेंट टैक्स लगाने की योजना क्यों बना रही है?
खडगे ने नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतानों पर जोर देने वाली सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस हालिया बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि यूपीआई लेनदेन पर कोई कर या शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने पूछा कि क्या 5,000 रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10,000 रुपये तक के लेनदेन पर 50 रुपये तक के शुल्क की खबरें सही हैं? राहुल गांधी ने कहा कि हालांकि सरकार का यह दावा है कि ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन मर्चेंट पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त बोझ का खर्च अंततः ग्राहकों की जेब से ही निकलेगा और वस्तुओं की कीमतों में जुड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर नीति का विरोध कर रही थीं और अमेरिकी व्यापार समझौते की तरह ही प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत जारी अधिसूचना में 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लेने से तो रोका गया है, लेकिन उससे ऊपर के लेनदेन के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने अंदेशा जताया कि संसद में जबरन पारित कराए गए नए कानूनों के जरिए सरकार यूपीआई पर शुल्क वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर रही है, जिससे भविष्य में दैनिक व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन पर भी शुल्क लगने का खतरा पैदा हो गया है।