यूके के ठिकाने पर ड्रोन हमले की आशंका थी
ईरानी सेना की योजना थी ऐसी
खतरा भांपकर सभी को हटाया गया
विदेशों में स्थापित सैन्य अड्डों पर ध्यान
लंदनः पिछले सप्ताह के अंत में, इंग्लैंड स्थित एक रॉयल एयर फोर्स बेस से एक दर्जन (बारह) उन्नत बी-1 बॉम्बर विमानों को अचानक वापस अमेरिका भेजने का निर्णय लिया गया। इस अचानक किए गए पुनः तैनाती (रीडप्लॉयमेंट) के पीछे मुख्य कारण इस सैन्य अड्डे पर किसी संभावित ड्रोन हमले की गहरी आशंका था। इस बात की पुष्टि इस मामले से अच्छी तरह वाकिफ तीन अलग-अलग सूत्रों द्वारा की गई है, जिन्होंने सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान गुप्त रखते हुए इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी साझा की है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन में स्थित इस सामरिक सैन्य अड्डे पर संभावित ड्रोन हमले की पूरी योजना ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स द्वारा निर्देशित और तैयार की गई थी। इस खतरनाक साजिश का उद्देश्य न केवल बेस के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाना था, बल्कि वहां तैनात सैन्य कर्मियों को भी सीधे तौर पर निशाना बनाना था। इस गंभीर खतरे की सूचना मिलने के बाद अमेरिकी और ब्रिटिश रक्षा अधिकारियों ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
चूंकि इस खतरे की प्रकृति बेहद गंभीर और तात्कालिक थी, इसलिए अमेरिकी वायु सेना ने अपने इन भारी और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बॉम्बर्स को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर वापस बुलाने का एहतियाती कदम उठाया। इस अचानक हुई वापसी ने मध्य पूर्व और यूरोप के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान की ओर से संभावित असममित खतरों की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ड्रोन खतरों से निपटने के लिए विदेशी धरती पर मौजूद सैन्य अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने की आवश्यकता है।