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सीजेपी ने कांग्रेस की रैली को दिया समर्थन

काफी दिनों तक दूरी बनाने के बाद रणनीति बदल दी

मुद्दा अभी देश के लिए महत्वपूर्ण

भाजपा ने आप की बी टीम कहा था

एक ऩवंबर की रैली का खुला समर्थन

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े संयुक्त आंदोलन का रूप लेते दिखाई दे रहे हैं।

महीनों की राजनीतिक दूरी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने बुधवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन द्वारा 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली महारैली को अपना औपचारिक समर्थन देने का ऐलान किया है।

इसके साथ ही सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की अपनी मांग को एक बार फिर से दोहराया है। इसके जरिए सीजेपी ने भाजपा के उस आरोप को भी दरकिनार कर दिया है, जिसमें उसे आम आदमी पार्टी की बी टीम बताया गया था।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्र सर्वोपरि! का संदेश साझा करते हुए अपनी युवा संस्था का एक आधिकारिक बयान जारी किया। अपने इस बयान में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यह है कि जनता अपनी सरकार चुनती है, न कि सरकार अपने मनमुताबिक मतदाताओं का चयन करे।

सीजेपी का मानना है कि एसआईआर (एसआईआर) प्रक्रिया के माध्यम से इस लोकतांत्रिक सिद्धांत को कमजोर किया गया है, जिससे मुख्य चुनाव आयुक्त निष्पक्ष चुनाव कराने का विश्वास खो चुके हैं। अतः चुनाव आयोग की साख और स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा बेहद आवश्यक है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ हफ्तों से सीजेपी और कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ अलग-अलग समानांतर अभियान चला रहे थे। इससे पहले अक्टूबर में दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से कांग्रेस ने दूरी बना ली थी, हालांकि तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों, शिवसेना (यूबीटी), आप और राकांपा (शरदचंद्र पवार) ने सीजेपी का खुलकर समर्थन किया था।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी हाल ही में कहा था कि सभी जनविरोध एक समान हैं। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस द्वारा सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा की थी और सीजेपी संस्थापक दीपके को हाई-टी के लिए भी आमंत्रित किया था। अब सीजेपी द्वारा इंडिया गठबंधन की महारैली को समर्थन देने से राजधानी दिल्ली की राजनीति में एक नए संयुक्त विपक्ष का उदय होता दिख रहा है।