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सारा जीवन पेंशन पाते हैं पर जवाबदेही कहाः जस्टिस नागरत्ना

पंजाब के मामले में सुनवाई करते हुए अदालत की तीखी टिप्पणी

दिन भर में तीन पेज टाइप करते हैं

सभी की जबावदेही अब तय कीजिए

पंजाब से संबंधित याचिका पर राय

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का भुगतान न करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने एक अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी एक विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग बन चुके हैं और काम में जवाबदेही तय करने के लिए भविष्य में उनकी भर्ती अनुबंध के आधार पर की जानी चाहिए।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, सरकारी कर्मचारियों को अब से अनुबंध के आधार पर ही रखा जाना चाहिए। तभी उनमें जवाबदेही आएगी। वे दिन भर में केवल तीन पन्ने टाइप करते हैं। वे न्यायिक विभाग में काम नहीं करना चाहते। हाई कोर्ट या जिला अदालत में भर्ती होने के बाद वे सभी सचिवालय चले जाते हैं, जहाँ दिन में केवल 3 पन्ने ही टाइप करने होते हैं!

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ राज्य के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों के दावों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इससे पहले हाई कोर्ट में जब राज्य सरकार ने पर्याप्त धन न होने की बात कही थी, तो हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि राज्य मुफ़्त की योजनाओं आदि पर खर्च कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रतिवादियों ने पंजाब सरकार की मुफ्त योजनाओं की ओर इशारा करते हुए अपना पक्ष रखा। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि दावा करने वाले सरकारी कर्मचारी विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग हैं, जबकि ये मुफ्त योजनाएँ वंचित और सीमांत वर्गों के लिए हैं।

जब वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत (प्रतिवादियों की ओर से) ने तर्क दिया कि सभी को एक ही नज़र से नहीं देखा जा सकता और कई सरकारी कर्मचारी बेहद मेहनती होते हैं, तो जज ने पलटकर कहा कि यदि सरकारी कर्मचारी इतने ही ईमानदार और समर्पित होते, तो देश में मुकदमों की संख्या काफी कम हो जाती।

इस पर कामत ने जवाब दिया कि राज्य को एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए। सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा, सरकारी कर्मचारियों की मृत्यु के बाद भी उनके परिवारों को पेंशन मिल रही है। आपके अपने ही लोग पेंशन जारी करने पर आपत्ति जताते हैं। हर जगह लालफीताशाही फैली हुई है। आखिर सरकारी कर्मचारी की जवाबदेही कहाँ है?

पीठ ने मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए कहा कि वह इस तरह के दबाव बनाने वाले तरीकों की सराहना नहीं कर सकती। जज ने कहा, आप इस तरह मुख्य सचिव को कटघरे में नहीं खड़ा कर सकते। आपको भुगतान कौन करने वाला है?