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एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चा तेज

अस्पताल में भर्ती शरद पवार से मिलने पहुंच प्रफुल्ल पटेल

मोदी ने पवार से फोन पर बात की थी

दस नवंबर के बाद बात-चीत का उल्लेख

अमित शाह से भी मिला था यह गुट

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो प्रमुख धड़ों के बीच एक बार फिर से सियासी गलियारों में पुनर्मिलन और विलय की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो और सत्ताधारी गुट के वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह घटनाक्रम दोनों धड़ों की भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

इस पूरी चर्चा की मुख्य वजह एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के बीच मुंबई के प्रतिष्ठित ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुई एक आकस्मिक मुलाकात का वीडियो है। वर्तमान में 85 वर्षीय दिग्गज नेता शरद पवार सीने में गंभीर संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती हैं और चिकित्सकीय निगरानी में अपना इलाज करा रहे हैं।

वायरल वीडियो में दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत साफ देखी जा सकती है, जिसमें शरद पवार को यह कहते हुए सुना गया कि वे लोग 10 नवंबर के बाद किसी बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं। प्रफुल्ल पटेल ने भी बाद में इस बात की पुष्टि की कि मुलाकात के दौरान राज्य और देश की समसामयिक राजनीति पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ था।

इस मुलाकात के ठीक बाद, सत्ताधारी एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने अपने पहले के सभी बयानों से पूरी तरह यू-टर्न लेते हुए एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज खुलासा किया है।

तटकरे ने मीडिया के सामने खुलकर स्वीकार किया कि दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के जीवित रहते हुए दोनों एनसीपी गुटों के बीच आधिकारिक रूप से एकीकरण और विलय को लेकर गंभीर बातचीत चल रही थी। तटकरे ने आगे दावा किया कि यदि 28 जनवरी 2026 को बारामती में हुए एक भीषण विमान हादसे में अजीत पवार का असमय और आकस्मिक निधन न हुआ होता, तो दोनों धड़ों का औपचारिक विलय उसी साल 12 फरवरी को तय तारीख पर हो जाता।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अजीत दादा ने खुद उनके साथ इस पूरी विलय प्रक्रिया, वार्ताओं की रूपरेखा और अन्य आंतरिक रणनीतियों को साझा किया था, क्योंकि वे उनके बेहद करीबी और विश्वासपात्र सहयोगियों में से एक थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन हालिया घटनाक्रमों के पीछे कुछ अंदरूनी राजनीतिक समीकरण भी काम कर रहे हैं। कुछ समय पहले ही दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एनसीपी के शीर्ष नेताओं की एक गुप्त और उच्च-स्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें पार्टीकी राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार शामिल नहीं थे। इस अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर नेतृत्व शैली, वित्तीय

पोर्टफोलियो और कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे आंतरिक असंतोष और मतभेदों को सतह पर ला दिया है। जानकारों का कहना है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता मौजूदा युवा नेतृत्व के काम करने के तरीके से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और पार्टी के दीर्घकालिक राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए शरद पवार के साथ समझौते की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला और रुख आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा।