एक्स को भेजे गये थे नकली नोटिस
मामले की जांच फिलहाल जारी है
दिल्ली पुलिस ने माना कि फर्जी है
आरएसएस के नाम का उपयोग हुआ
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः इस सप्ताह इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन और सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर जैसे डिजिटल अधिकार समूहों को मिले कानूनी नोटिसों ने ऑनलाइन विवाद खड़ा कर दिया, जिससे भारत में बढ़ते इंटरनेट सेंसरशिप को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। लेकिन ये नोटिस एक सोचे-समझे धोखे का हिस्सा प्रतीत होते हैं, जिसने न केवल डिजिटल अधिकार समूहों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बल्कि दिल्ली पुलिस को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
इस विवाद की शुरुआत 30 अक्टूबर को हुई थी, जब डिजिटल अधिकार समूहों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम से मिले उन कथित कानूनी नोटिसों को सार्वजनिक किया, जिनमें उन्हें सरकारी सामग्री प्रतिबंध आदेशों का दस्तावेजीकरण करने और उनका विरोध करने से रोकने के लिए कहा गया था। आरएसएस ने इन नोटिसों पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सलाहकार कंचन गुप्ता और आरएसएस के सदस्य व लेखक रतन शारदा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तुरंत यह खंडन किया कि संगठन ने ऐसा कोई नोटिस भेजा है।
इसके बाद डिजिटल अधिकार समूहों को एक्स से एक संदेश मिला, जिसमें बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने एक अवैध सामग्री रिपोर्ट भेजी है, जिसमें उनके पोस्ट और खातों को हटाने की मांग की गई है, क्योंकि वे आरएसएस के खिलाफ मानहानि करने वाले थे। हालांकि, न केवल आरएसएस के नाम पर भेजा गया नोटिस फर्जी है, बल्कि मामले से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने स्क्रॉल को बताया कि एक्स को भेजा गया कथित पुलिस संचार भी जाली है।
जांच में पता चला कि इस पूरी घटना की शुरुआत 29 अक्टूबर को बनाए गए एक ईमेल पते से हुई थी, जिसे डिजिटल संगठनों को कथित कानूनी नोटिस भेजे जाने से सिर्फ छह घंटे पहले बनाया गया था। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन द्वारा 30 अक्टूबर को एक्स पर जारी एक बयान के अनुसार, संगठन को पिछली रात एक प्रेषक से एक ईमेल मिला था, जिसने खुद को गौरव तिवारी नामक वकील के रूप में पहचाना था। तिवारी ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्देशों और अधिकार पर उन्हें एक कानूनी नोटिस भेज रहे हैं। नोटिस में संगठन पर राष्ट्र-विरोधी, भड़काऊ और भ्रामक सामग्री को हटाने के सरकारी आदेशों का विरोध करने का आरोप लगाया गया। इसी तरह के नोटिस सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर और जियो ब्लॉक्ड इन इंडिया नाम के एक एक्स अकाउंट को भी ईमेल किए गए थे।