Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Uttarakhand Disaster Management Model: ब्रिक्स देशों ने मानी उत्तराखंड की धाक; आपदा प्रबंधन मॉडल की ... Akshay Kumar Charity: क्या अक्षय कुमार सिर्फ पैसा कमाने के लिए करते हैं फिल्में? एक्टर ने चैरिटी के ... Manav Suthar Test Debut: टेस्ट डेब्यू पर 6 विकेट लेकर रचा इतिहास; मानव सुथार ने 18 साल का सूखा किया ... Israel-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में फिर छिड़ा युद्ध का खतरा; क्या नेतन्याहू की जंग की जिद बन रही है ... Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट; जानें क्या है आज का नया भाव Environmental Impact of AI: एआई की बढ़ती मांग से बढ़ रहा जल संकट; 2027 तक हालात हो सकते हैं गंभीर Kalashtami Vrat 2026: कालाष्टमी पर काल भैरव देव की विशेष पूजा; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व Banarasi Kachori Sabji Recipe: घर पर बनाएं बनारस का प्रसिद्ध नाश्ता; कचौड़ी-सब्जी बनाने की आसान विधि MP Rajya Sabha Election 2026: तीसरी सीट पर भाजपा का दांव; महेश केवट के नामांकन के बाद बढ़ी सियासी हलच... Earthquake in Northeast: भूटान के पास 5.7 तीव्रता का जोरदार भूकंप; सिक्किम और बंगाल तक महसूस किए गए ...

अपनी आय मे गुजारा करें न्यायाधीशः जस्टिस नागरत्ना

लालच के शिकार लोगों को बाहर किया जाना चाहिए

  • अपने वेतन के दायरे में ही रहें जज

  • बाहरी दबावों से खुद को मुक्त रखें

  • कोई फैसला दूसरों की राय से नहीं

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरु: सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने आज कहा कि शीर्ष अदालत ने जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों में वृद्धि के लिए दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इसके बावजूद न्यायाधीश अपनी ज्ञात आय के स्रोतों के भीतर रहने में असमर्थ हैं और लालच या प्रलोभन का शिकार हो जाते हैं, तो उन्हें व्यवस्था से बाहर कर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, वेतन आयोग की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार किए जाने के कारण जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों में पर्याप्त वृद्धि हुई है। इसके साथ ही उन्होंने न्यायाधीशों को बाहरी दबाव के प्रति भी आगाह किया, जो उनके अपने सहयोगियों की ओर से भी आ सकता है।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, जो न्यायाधीश अपनी आय के ज्ञात स्रोतों के भीतर रहने में असमर्थ हैं और लालच का शिकार हो जाते हैं, उन्हें सिस्टम से बाहर निकाला जाना चाहिए। मैं यह भी जोड़ना चाहूंगी कि न्यायाधीशों को बाहरी दबावों या अपने सहयोगियों के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। उन्हें साहस और स्वतंत्रता विकसित करनी चाहिए।

निर्णय लेने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का तालमेल नहीं हो सकता। किसी न्यायाधीश द्वारा दिया गया कलंकित निर्णय न केवल उस न्यायाधीश पर, बल्कि पूरी न्यायपालिका पर एक काला धब्बा होता है। इसलिए, हमें वादकारी जनता और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य के प्रति सचेत रहना चाहिए। वे बेंगलुरु में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में न्यायपालिका की पुनर्कल्पना विषय पर आयोजित न्यायिक अधिकारियों के 22वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन में बोल रही थीं।

उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान स्वयं को संरक्षित और समर्थित महसूस करें। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि पदोन्नति, नियुक्ति और स्थानांतरण से संबंधित अनुच्छेद 235 का निष्पक्ष प्रयोग होना चाहिए।

उन्होंने कहा, जिला स्तर पर न्यायाधीशों की स्वतंत्रता और मनोबल दोनों को बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालयों द्वारा एक निष्पक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन अनिवार्य है। उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री की निष्पक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी न्यायिक अधिकारी को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसे मझधार में छोड़ दिया गया है क्योंकि रजिस्ट्री समय पर उनकी वास्तविक शिकायतों के समाधान के लिए आवश्यक कदम नहीं उठा रही है। इस कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभु भाखरू और न्यायिक जगत के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।