Uttarakhand Disaster Management Model: ब्रिक्स देशों ने मानी उत्तराखंड की धाक; आपदा प्रबंधन मॉडल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना
पुरी/देहरादून: प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील होने के बावजूद उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। हाल ही में ओडिशा के पुरी में आयोजित ‘BRICS Disaster Risk Reduction (DRR) वर्किंग ग्रुप’ की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना हुई। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 11 ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के विशेषज्ञों ने उत्तराखंड की तैयारियों को एक सफल ‘केस स्टडी’ के रूप में देखा।
🗺️ भौगोलिक चुनौतियों से निपटने का नया नजरिया
सम्मेलन में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी (आईपीएस) और यूएलएमएमसी निदेशक शांतनु सरकार ने राज्य की भौगोलिक जटिलताओं, ग्लेशियर झीलों और भूस्खलन जैसे खतरों का सामना करने की रणनीति को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में बहु-एजेंसी समन्वय प्रणाली और वैज्ञानिक योजना के जरिए आपदाओं के जोखिम को न्यूनतम किया जा रहा है।
🛡️ सिल्कयारा रेस्क्यू: तकनीक और मानवीय संवेदना का मेल
बैठक में विशेष रूप से ‘सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू’ और ‘धराली आपदा प्रबंधन’ कार्यों को प्रमुखता से पेश किया गया। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में धैर्य, आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। प्रतिनिधियों ने इसे चुनौतीपूर्ण स्थितियों में ‘सर्वश्रेष्ठ आपदा प्रतिक्रिया मॉडल’ (Best Disaster Response Model) के रूप में सराहा।
💡 तकनीक और समुदाय की भागीदारी का महत्व
उत्तराखंड मॉडल की सफलता का मुख्य आधार तकनीक और स्थानीय समुदायों का तालमेल है। राज्य में रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) का उपयोग आपदा जोखिम न्यूनीकरण को अधिक प्रभावी बना रहा है। अर्पण यदुवंशी ने कहा कि उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन केवल राहत-बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्व तैयारी और प्रशिक्षित बलों की उपलब्धता पर आधारित एक व्यापक ढांचा है।
🌐 ब्रिक्स बैठक का संदेश
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच साझा रणनीतियां विकसित करना था। उत्तराखंड को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और एसडीआरएफ (SDRF) के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। यह गौरव का विषय है कि हिमालयी राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र आज दुनिया के बड़े देशों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।