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दक्षिण पश्चिमी मॉनसून का आगे बढ़ना जारी

अल नीनो के निरंतर मजबूत होने के संकेत हैं

  • पश्चिमी तट से आगे निकले बादल

  • महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में दस्तक

  • पूर्वोत्तर में भी इसका प्रभाव पहुंचा

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरम: शनिवार को भारतीय मानसून ने अपनी वार्षिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव तय करते हुए पश्चिमी तट और प्रायद्वीपीय भारत के आंतरिक हिस्सों में अपनी सक्रियता को और अधिक बढ़ा दिया है। मौसम की यह सक्रियता न केवल भौगोलिक दृष्टि से व्यापक है, बल्कि कृषि प्रधान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी की तरह है।

मानसून की प्रगति इतनी प्रभावी रही है कि इसने न केवल गोवा के पूरे भू-भाग को अपने आगोश में ले लिया है, बल्कि कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा आंध्र प्रदेश के महत्वपूर्ण हिस्सों में भी दस्तक दे दी है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है, जबकि पूर्वोत्तर में मिजोरम और मणिपुर तक मानसून का विस्तार हो चुका है, जो इस क्षेत्र में आगामी दिनों में व्यापक वर्षा की संभावनाओं को प्रबल करता है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शनिवार दोपहर तक मानसून की उत्तरी सीमा महाराष्ट्र के तटीय शहर देवगढ़, कर्नाटक के कोप्पल, आंध्र प्रदेश के अनंतपुरमु, चेन्नई और पूर्वोत्तर में आइजोल के ऊपर से गुजर रही थी। यह भौगोलिक रेखा मानसून की सक्रियता की स्पष्ट दिशा को इंगित करती है।

विभाग के मौसम विशेषज्ञों ने आगामी दो से तीन दिनों के लिए एक सकारात्मक पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के शेष आंतरिक हिस्सों, तमिलनाडु के बचे हुए क्षेत्रों तथा पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में तेजी से आगे बढ़ने के लिए स्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं।

हालांकि, यह प्रगति ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक मौसम चक्र में अल नीनो के संकेतों के और अधिक मजबूत होने की चर्चाएं तेज हैं। सामान्यतः अल नीनो का प्रभाव मानसून की वर्षा के वितरण और तीव्रता के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जिससे देश में वर्षा की कुल मात्रा और उसके समय पर प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

इन वैज्ञानिक चेतावनियों के बीच, भारत के कृषि क्षेत्र और जल प्रबंधन निकायों के लिए आगामी कुछ दिन अत्यंत निर्णायक और महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। किसानों की बुआई की तैयारी से लेकर जलाशयों के जल स्तर को बनाए रखने तक, मौसम का यह मिजाज देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।