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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी में सीबीआई का आरोप

वरीय अफसरों की मिलीभगत से हुआ घोटाला

  • चार अफसरों के यहां छापा भी पड़ा

  • तीन तो आईएएस संवर्ग के अफसर

  • क्रेस्ट के संचालन से जुड़े थे सभी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में हुए 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच तेज करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो ने शनिवार को हरियाणा कैडर के तीन आईएएस अधिकारियों और एक आईएफएस (IFS) अधिकारी के आवासों पर छापेमारी की। एजेंसी का आरोप है कि ये लोक सेवक अनुचित लाभ के बदले सरकारी धन के दुरुपयोग में शामिल थे।

सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, जांच के घेरे में आए आईएएस अधिकारियों में मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल और प्रदीप कुमार शामिल हैं। वहीं, चौथे अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव हैं, जो एजीएमयूटी कैडर के आईएफएस अधिकारी हैं और फिलहाल चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी में प्रतिनियुक्ति पर हैं। राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा प्रारंभिक जांच के बाद हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने इस मामले को अपने हाथ में लिया था।

घोटाले का खुलासा फरवरी में तब हुआ जब एक सरकारी खाते को बंद करने की सामान्य प्रक्रिया के दौरान भारी अनियमितताएं सामने आईं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने शेयर बाजारों को सूचित करते हुए माना कि उसके कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलीभगत की थी। बैंक ने हरियाणा सरकार को मूलधन और ब्याज सहित 578 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं।

सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले महीने पंचकूला की एक विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल पहली चार्जशीट में लोक सेवकों की भूमिका का विवरण दिया गया है। जांच में नोएडा स्थित फर्म विपम कंसल्टेंसी को “अपराध की कमाई” का मुख्य लाभार्थी माना गया है। एजेंसी के अनुसार, इन लोक सेवकों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर खाते खुलवाने, धन के हस्तांतरण और उसके बाद हेराफेरी में मदद की। छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्ति के कागजात जब्त किए गए हैं।

जांच से पता चला है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार इस साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने सरकारी विभागों के अधिकारियों को 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का लालच देकर उनके अधिशेष धन को अपने बैंकों में फिक्सड डिपॉजिट के रूप में जमा करने के लिए प्रेरित किया, जिसे बाद में फर्जी कंपनियों के माध्यम से हड़प लिया गया।