सैन्य निविदाओँ में भ्रष्टाचार का एक और मामला उजागर
राष्ट्रीय खबर
कोलकाता: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सेना के टेंडरों में कथित अनियमितताओं और भारी रिश्वतखोरी के मामले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना के एक सेवारत कर्नल को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान कर्नल हिमांशु बाली के रूप में हुई है, जो कोलकाता के फोर्ट विलियम स्थित ईस्टर्न कमांड (पूर्वी कमान) में आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स में तैनात थे। सीबीआई ने यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज करने के बाद की है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानपुर स्थित रक्षा सामग्री आपूर्तिकर्ता कंपनी ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड के संचालकों और दलालों को भी नामजद किया गया है। कर्नल बाली पर आरोप है कि उन्होंने इस निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सैन्य टेंडरों के आवंटन में हेरफेर की, घटिया क्वालिटी के नमूनों को मंजूरी दी और कंपनी के लंबित व बढ़ाए गए बिलों को आसानी से क्लियर करवाया।
सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, यह पूरा सौदा करोड़ों रुपये का था, जिसके बदले कर्नल बाली को मोटी रिश्वत दी जानी थी। जांच एजेंसी का दावा है कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान एक महत्वपूर्ण सैन्य टेंडर को रिश्वत के बदले इसी कंपनी को दिलाया गया था। कर्नल बाली और कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच 22 अप्रैल 2026 को कोलकाता के प्रसिद्ध पार्क स्ट्रीट इलाके में एक गुप्त बैठक हुई थी, जहां इस सौदे को अंतिम रूप दिया गया। इसके ठीक दो दिन बाद, यानी 24 अप्रैल को संबंधित टेंडर आधिकारिक तौर पर आरोपी कंपनी को आवंटित कर दिया गया।
इसके बाद, 16 मई 2026 को कर्नल बाली ने कंपनी के मालिकों से रिश्वत की बकाया राशि के रूप में 50 लाख रुपये की मांग की थी। व्यापारी ने नकद की कमी का हवाला दिया, जिसके बाद कर्नल ने कथित तौर पर व्यापारी के ड्राइवर से संपर्क कर इस राशि को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अपने एक परिचित तक पहुंचाने का निर्देश दिया। जांच में सामने आया कि इस 50 लाख रुपये की बड़ी रकम को चांदनी चौक से हवाला चैनलों के जरिए दिल्ली ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन इससे पहले ही सीबीआई ने जाल बिछाकर छापेमारी की और इस रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया।
सीबीआई ने इस मामले में कर्नल हिमांशु बाली के साथ-साथ निजी ठेकेदारों और दलालों—अक्षत अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला और नरेश पाल सहित कई अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है। रक्षा प्रतिष्ठानों में इस स्तर के वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद सेना और रक्षा मंत्रालय ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस रैकेट में ईस्टर्न कमांड के कुछ अन्य सैन्य या नागरिक अधिकारी भी शामिल थे और यह कंपनी पहले से कितने सैन्य टेंडरों में इस तरह की धांधली कर चुकी है।