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निजी स्कूलों की फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ राज्य का फैसला

पंजाब में फीस वृद्धि सिर्फ पांच प्रतिशत होगी

मनमानी फीस बढ़ोत्तरी पर रोक लगेगी

विधानसभा में पारित किया इसका प्रस्ताव

पांच फीसद में सभी शुल्क शामिल होंगे

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः पंजाब विधानसभा ने राज्य के लाखों अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक फैसले के तहत प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ोतरी की सीमा अधिकतम 5 प्रतिशत तय कर दी है। इसके अलावा सदन ने तीन नई डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी स्थापित करने से जुड़े विधेयकों को भी सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

राज्य के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा सदन में पेश किए गए पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने से राज्य के करीब 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ रहे लगभग 32 लाख छात्रों और उनके अभिभावकों को हर साल मनमाने ढंग से बढ़ाए जाने वाले शुल्क से बड़ी राहत मिलेगी।

सदन में इसके साथ ही क्लाउड यूनिवर्सिटी, एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने वाले तीन यूनिवर्सिटी विधेयक भी पास किए गए। शिक्षा मंत्री बैंस ने कहा कि ये डिजिटल यूनिवर्सिटीज हमारे बच्चों को आधुनिक समय की जरूरतों के अनुकूल आवश्यक कौशल से लैस करने में मददगार साबित होंगी।

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि ट्यूशन फीस के अलावा अन्य सभी तरह के शुल्कों को मिलाकर सालाना कुल फीस वृद्धि की सीमा सिर्फ 5 प्रतिशत होगी। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ घोषणा की कि जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान निर्धारित 5 प्रतिशत से ज्यादा फीस वसूली है, उन्हें वह अतिरिक्त राशि वापस लौटानी होगी।

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि अमृतसर में एक कम उम्र की बच्ची की आत्महत्या की घटना से उनका दिल दहल गया था, क्योंकि स्कूल प्रबंधन द्वारा फीस न चुका पाने पर उस बच्ची को अपमानित किया गया था। पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए सीएम मान ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब बच्चे स्कूल नहीं गए थे, तब भी अभिभावकों से जबरन ट्रांसपोर्ट फीस वसूली गई थी। उन्होंने दोटूक कहा कि वे शिक्षा के व्यावसायीकरण को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

दूसरी ओर, कांग्रेस विधायकों ने विश्वविद्यालय से जुड़े विधेयकों पर निर्दलीय विधायक राणा इंदर प्रताप को चर्चा के लिए अधिक समय देने की मांग की, जिसे स्पीकर ने ठुकरा दिया। इसके बाद कांग्रेस विधायकों और राणा इंदर प्रताप ने वेल में आकर सरकार व स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी की। भारी हंगामे के बीच ही पंजाब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम में संशोधन का एक अन्य बिल भी पास कर दिया गया।

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने इस विधेयक को पुरानी बोतल में नई शराब करार दिया। उन्होंने कहा कि पहले फीस वृद्धि की सीमा 8 प्रतिशत थी, जिसे अब घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। सरकार सदन में कुछ कहती है और अदालत में उसका रुख दूसरा होता है। वहीं, कांग्रेस विधायक अवतार हेनरी जूनियर ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में नाकामी को छिपाने के लिए यह बिल लाया गया है, जहां 2022 से 2026 के बीच छात्र नामांकन में 6 लाख की भारी गिरावट आई है। सरकार का पक्ष रखते हुए शिक्षा मंत्री बैंस ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार शिक्षा को हर नागरिक का मौलिक अधिकार मानती है। नीति आयोग ने भी राज्य के प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय सुधार की सराहना की है।