Breaking News in Hindi

टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की पुनः नियुक्ति को दी चुनौती

टाटा घराने का विवाद अब औपचारिक तौर पर सार्वजनिक हुआ

नोएल टाटा पहले से ही विरोध में थे

बोर्ड का फैसला आने के बाद प्रतिक्रिया

टाटा ट्रस्ट्स के पास 66 फीसद हिस्सा

राष्ट्रीय खबर

मुंबई: टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि टाटा सन्स के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन को पुनः नियुक्त करने वाला प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य है, क्योंकि इसे दोनों ट्रस्ट-नामित निदेशकों का अनिवार्य समर्थन नहीं मिला है।

टाटा ट्रस्ट्स ने तर्क दिया है कि 4:1 का कुल मतदान अप्रासंगिक था, क्योंकि इसके दो नामांकित व्यक्तियों में से एक ने प्रस्ताव का विरोध किया, जिससे कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) के तहत एक अलग शर्त पूरी नहीं हो पाई। टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसके बोर्ड में इसके दो नामित निदेशक हैं। ट्रस्टों के अनुसार, दोनों के बीच बहुमत का अर्थ है कि दोनों को इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए।

ट्रस्टों ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि इस मतदान से बोर्ड में गतिरोध (डेलॉक) पैदा हो गया है, यह कहते हुए कि चेयरमैन का निर्णायक वोट इस आवश्यकता को ओवरराइड नहीं कर सकता। इसने इस प्रस्ताव को वॉयड एब इनिशियो यानी शुरुआत से ही अमान्य घोषित कर दिया। यह बयान 17 सितंबर को टाटा सन्स बोर्ड द्वारा समूह होल्डिंग कंपनी के चेयरमैन के रूप में चंद्रशेखरन के बने रहने के पक्ष में 4:1 से मतदान करने के बाद आया है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा सन्स के निदेशक नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और इसकी वैधता को चुनौती दी।

4:1 का वोट अप्रासंगिक है इस विवाद के केंद्र में आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन हैं, जिनमें टाटा सन्स को नियंत्रित करने वाले नियम शामिल हैं। टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, बोर्ड के फैसलों को केवल कुल वोटों की गिनती के आधार पर तय नहीं किया जा सकता है। इसके लिए ट्रस्टों द्वारा नामित निदेशकों के बहुमत के सकारात्मक समर्थन की भी आवश्यकता होती है। ट्रस्टों ने तर्क दिया कि चूंकि दो ट्रस्ट नामितों में से एक ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया, इसलिए इस प्रस्ताव को आवश्यक अनुमोदन नहीं मिला।

टाटा ट्रस्ट्स ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि प्रस्ताव के उसके विरोध ने एक ऐसा गतिरोध पैदा कर दिया है जो कंपनी को पंगु बना सकता है। इसने कहा कि कोई टाई (बराबर वोट) नहीं था क्योंकि बोर्ड ने 4:1 से मतदान किया था। ट्रस्टों के अनुसार प्रस्ताव फिर भी विफल रहा, क्योंकि इसे इसके नामित निदेशकों से आवश्यक अलग अनुमोदन नहीं मिला था।

इस व्याख्या के आधार पर, टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चंद्रशेखरन को कानूनी रूप से पुनः नियुक्त नहीं किया गया है। इस विवाद ने उस उत्तराधिकार के मुद्दे को फिर से खोल दिया है जो अगस्त में चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में अपना वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने पर दूसरा कार्यकाल नहीं चाहने के फैसले के बाद सुलझा हुआ प्रतीत होता था। अब सारा ध्यान कंपनी की स्थगित वार्षिक आम बैठक पर केंद्रित होगा, जो 31 दिसंबर तक आयोजित की जानी है।