नागा छात्र संगठन ने रोकने पर सवाल उठाया
म्यांमार जा रहा था यह प्रतिनिधिमंडल
सीमा पर तैनात सुरक्षा बल ने रोका
सुरक्षा के नाम पर नागरिक अधिकार हनन
उत्तर पूर्व संवाददाता
गुवाहाटीः कई नागा छात्र संगठनों ने 19 सितंबर को मेलुरी जिले के अवांगखु चेकगेट पर नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन के एक प्रतिनिधिमंडल को कथित रूप से रोके जाने की कड़ी निंदा की है। यह प्रतिनिधिमंडल सीमा पार के नागा समुदायों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए म्यांमार जाने वाला था, लेकिन उसे रोक दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के पास अपनी इस प्रस्तावित यात्रा के लिए संदर्भ पत्र थे, फिर भी अवांगखु में तैनात 39वीं असम राइफल्स के जवानों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
अंगामी स्टूडेंट्स यूनियन ने इस घटना की निंदा करते हुए सवाल उठाया कि क्या इस प्रतिबंध को भारत सरकार का समर्थन प्राप्त है, खासकर नागा लोगों के अद्वितीय इतिहास की उसकी अपनी स्वीकृतियों को देखते हुए। एएसयू ने एनएसएफ के साथ एकजुटता व्यक्त की और नागा नागरिकों से अपने अधिकारों तथा आकांक्षाओं के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।
पोचुरी स्टूडेंट्स यूनियन, जिसके अधिकार क्षेत्र में यह घटना घटी, ने असम राइफल्स से इस प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने के आधार पर स्पष्टीकरण मांगा है। इसने सवाल किया कि आखिरकार इसके पीछे कौन सी विशिष्ट सुरक्षा चिंता या उल्लंघन था और किस कानून, आदेश या लिखित निर्देश के तहत जवानों को प्रतिनिधिमंडल को रोकने के लिए अधिकृत किया गया था। पीएसयू का तर्क था कि सुरक्षा चिंताओं को नागरिक गतिविधियों को सीमित करने के लिए एक सामान्य बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
ऑल सुमी स्टूडेंट्स यूनियन ने भी इस कथित कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए एनएसएफ को नागा छात्र समुदाय का एक प्रतिनिधि संस्थान बताया। उन्होंने कहा कि फेडरेशन के आवागमन में बाधा डालना नागा लोगों की गरिमा और उनकी आकांक्षाओं को कमजोर करता है। वहीं, ऑल जेलियांग्रॉन्ग स्टूडेंट्स यूनियन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा के दोनों ओर के नागा समुदायों के बीच सांस्कृतिक समझ, आपसी संबंधों और ऐतिहासिक-सामाजिक बंधनों को बढ़ावा देना था।
आओ स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के प्रतिबंध नागा बहुल क्षेत्रों में काम करने वाले सुरक्षा बलों और नागा लोगों के बीच आपसी सम्मान, समझ तथा विश्वास को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं। विभिन्न संगठनों ने एक स्वर में एनएसएफ के प्रति अपना समर्थन जताया है और अधिकारियों से पारदर्शी तथा कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने की मांग की है।