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टाइप 2 डायबिटीज का नया इलाज खोजा गया

इंसुलिन और दवा नहीं बिजली से होगा यह काम

सोना और प्लैटिनम के सुक्ष्म कणों से तैयार

ग्लूकोज को ग्लूकोनेट में बदलता रहता है यह

स्तर सामान्य होते ही खुद ही बंद होता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिकों ने एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक इम्प्लांट विकसित किया है जो बिना इंसुलिन या पारंपरिक दवाओं के मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित चूहों में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और वजन घटाने में सक्षम है। यह तकनीक टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में एक नई क्रांति ला सकती है। पारंपरिक दवाओं के विपरीत, यह उपकरण अतिरिक्त ब्लड शुगर को एक ऐसे पदार्थ में बदल देता है जिसे शरीर प्राकृतिक रूप से बाहर निकाल देता है।

ईटीएच ज्यूरिख के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह उपकरण जीवित कोशिकाओं या एंजाइम पर निर्भर नहीं है। इम्प्लांट के केंद्र में सोने और प्लैटिनम के सूक्ष्म कणों से ढका एक ग्रेफाइट फेल्ट है, जो ग्लूकोज को संसाधित करने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है। यह उपकरण 13.56 मेगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर वायरलेस तरीके से ऊर्जा प्राप्त करता है।

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जब भोजन के बाद शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है, तो एक ग्लूकोज सेंसर ब्लूटूथ के जरिए स्मार्टफोन या स्मार्टवॉच को संदेश भेजता है। इसके बाद उपकरण सक्रिय होकर अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लूकोनेट में बदल देता है। ग्लूकोनेट मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है। चूंकि अतिरिक्त ग्लूकोज वसा में परिवर्तित नहीं हो पाता, इसलिए यह वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। जैसे ही ब्लड शुगर का स्तर सामान्य होता है, इम्प्लांट स्वचालित रूप से बंद हो जाता है।

चूहों पर छह सप्ताह तक किए गए परीक्षणों में उपकरण ने पूरी तरह से सुरक्षित और सटीक परिणाम दिए। परीक्षण के दौरान चूहों के शरीर के ऊतकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक दवाओं के बजाय सीधे इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा ग्लूकोज को नियंत्रित करने का नया मार्ग खोलती है। अब शोधकर्ता इस प्रायोगिक इम्प्लांट को मानव परीक्षण के लिए चिकित्सा उपकरण के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं।

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