दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की मेहनत सफल हुई
इनसे लंबी दूरी तय करना आसान
मुख्य बाधा को पार भी कर लिया है
बैटरियों का आकार भी छोटा हो जाएगा
राष्ट्रीय खबर
रांचीः दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे एक बार चार्ज करने पर लंबी दूरी तय करने में सक्षम छोटी और हल्की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरियां बनाई जा सकती हैं। केस्ट (कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी) के वैज्ञानिकों ने एनोड-फ्री (एनोड-रहित) बैटरियों की एक प्रमुख कमजोरी को दूर करने का समाधान ढूंढ लिया है।
ये बैटरियां ग्रेफाइट जैसी पारंपरिक सामग्रियों को हटाकर बैटरी के आकार और वजन को कम करती हैं। हालांकि ये कम जगह में अधिक ऊर्जा स्टोर कर सकती हैं, लेकिन चार्जिंग के दौरान नुकीले लिथियम स्ट्रक्चर (डेन्ड्राइट्स) बनने के कारण इनका जीवनकाल सीमित होता है। शोधकर्ताओं ने सेमीकंडक्टर उद्योग की सटीक निर्माण तकनीकों को अपनाकर इस समस्या का समाधान किया, जिससे लिथियम का फैलाव समान रूप से होता है और एक मजबूत सुरक्षात्मक परत का निर्माण होता है।
22 सितंबर को केस्ट ने केमिकल एंड बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जिनवू ली और प्रोफेसर ही-ताए जंग के नेतृत्व में इस सफलता की घोषणा की। इस प्रोजेक्ट में कांगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी और नेशनल नैनोफैब सेंटर के वैज्ञानिक भी शामिल थे।
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पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों में, लिथियम ग्रेफाइट जैसे एनोड में स्टोर होता है। इसके विपरीत, एनोड-फ्री बैटरियां लिथियम को सीधे तांबे के पन्नी (कॉपर फॉयल) की पतली शीट पर इकट्ठा होने देती हैं। पारंपरिक एनोड को हटाने से बैटरी का वजन और मोटाई कम हो जाती है, जिससे कम जगह में अधिक ऊर्जा स्टोर की जा सकती है। हालांकि, बार-बार चार्ज-डिचार्ज होने से तांबे की सतह पर लिथियम नुकीली आकृतियों (डेन्ड्राइट्स) में जमा होने लगता है, जो प्रदर्शन को प्रभावित करता है और बैटरी को जल्दी खराब कर देता है।
शोध टीम ने अतिरिक्त सामग्री जोड़ने के बजाय तांबे की फॉयल की संरचना को बदला। उन्होंने सेमीकंडक्टर निर्माण तकनीक (सेकंडरी स्पटरिंग लिथोग्राफी) का उपयोग करके तांबे की सतह पर सूक्ष्म ट्यूबों (माइक्रोस्कोपिक ट्यूब) का एक पैटर्न बनाया। 300 नैनोमीटर चौड़ी और 150 नैनोमीटर ऊंची इन ट्यूबों ने तांबे की फॉयल के उपलब्ध सतह क्षेत्र को लगभग चार गुना बढ़ा दिया, जिससे लिथियम समान रूप से फैलता है।
इसके साथ ही, शोधकर्ताओं ने तांबे की फॉयल पर टू-डायमेंशनल मैटेरियल की 10 नैनोमीटर पतली परत चढ़ाई। यह कोटिंग लिथियम फ्लोराइड से समृद्ध एक मजबूत सुरक्षात्मक परत के निर्माण में मदद करती है, जो अवांछित रासायनिक प्रतिक्रियाओं और नुकीले लिथियम जमाव को रोकती है।
प्रोफेसर जिनवू ली ने बताया कि यह अध्ययन दिखाता है कि सेमीकंडक्टर निर्माण की अल्ट्राफाइन तकनीकों से एनोड-फ्री बैटरियों का जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है। यह तकनीक भविष्य के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अधिक कॉम्पैक्ट और कुशल ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने में मदद करेगी।
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