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जेएनयू के आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय की रोक

प्रोफेसर और सांसद बिमोल अकोइजम का मामला

जेएनयू की कार्रवाई में प्रशासनिक खामी

सोशल साइसेंज के प्रोफेसर पद पर हैं वह

कांग्रेस सांसद ने कहा राजनीति हो रही है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः  दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार, 2 नवंबर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच कांग्रेस के लोकसभा सांसद और प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया था। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने यह अंतरिम आदेश अकोइजम द्वारा अदालत में यह दलील दिए जाने के बाद पारित किया कि यह फैसला लेने से पहले उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में तय की है।
इन्नर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। कई छात्राओं की शिकायतों के बाद जेएनयू की आंतरिक समिति ने मामले की जांच की थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जेएनयू प्रशासन ने 9 अक्टूबर को अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
दूसरी ओर, अकोइजम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए इस पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है और प्रक्रियात्मक खामियों का आरोप लगाया है। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने भी इन आरोपों के संबंध में अकोइजम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और मामले की जांच जारी है।