कांग्रेस ने रोक के साथ जेपीसी की मांग कर दी
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शक्ति सिंह गोहिल की प्रेस वार्ता
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कनाडा की कंपनी को क्यों बेचा
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पूर्व के वादे को तोड़ा जा रहा है
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने आईडीबीआई बैंक की कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को प्रस्तावित बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उन्होंने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विनिवेश प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने और संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की।
गोहिल ने आरोप लगाया कि बैंक को उसी के पैसों से खरीदा जा रहा है। फेयरफैक्स के चेयरमैन प्रेम वात्सा और प्रेसिडेंट पीटर क्लार्क के साथ एक विश्लेषक की बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि भुगतान किस्तों में किया जाएगा, जिसमें कंपनी शुरुआत में कुछ धनराशि मुहैया कराएगी और शेष राशि के लिए बैंक के अपने संसाधनों का उपयोग करेगी।
मूल्यांकन घटाकर बेचने का आरोप कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार मूल्यांकन में संशोधन करके एक फायदे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को विदेशी कंपनी को बेच रही है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में शेयरों की कीमत 94.42 रुपये तय की गई थी, लेकिन केवल दो संभावित खरीदारों की बोलियां खुलने के बाद इसे संशोधित कर 75 रुपये कर दिया गया। अब सरकार 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर अच्छा सौदा मिलने का दावा कर रही है। उन्होंने मांग की कि मूल और संशोधित दोनों मूल्यांकन रिपोर्टों को दूसरे बोलीदाता के विवरण के साथ सार्वजनिक किया जाए।
गोहिल ने याद दिलाया कि 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने संसद को आश्वासन दिया था कि आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी कभी भी 51 प्रतिशत से नीचे नहीं गिरेगी, लेकिन यह आश्वासन महज एक जुमला बनकर रह गया है।
सार्वजनिक संपत्ति और नौकरियों पर खतरा उन्होंने बताया कि बैंक ने 2021 से 2026 के बीच 30,105 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। गोहिल ने बैंक की अचल संपत्तियों पर भी चिंता जताई, जिनमें हैदराबाद की साइबर सिटी में 50 एकड़ जमीन सहित 29 कीमती संपत्तियां शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक क्षेत्र का दर्जा समाप्त होने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजनों और महिलाओं को मिलने वाले आरक्षण लाभ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। गोहिल ने इस मुद्दे पर आरएसएस और स्वदेशी जागरण मंच की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए बिक्री रोकने और जेपीसी जांच की मांग दोहराई।