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अपने कार्यक्रम से गायब दिखे नवीन पटनायक

एमएमडीआर पर गरमाई हुई है राज्य की पूरी सियासत

लोअर पीएमजी पर इंडिया गठबंधन

लोकभवन में नवीन के करीबी भी गायब

भाजपा ने मौका देख तुरंत ही तंज कसा

प्रसन्न मोहंति

भुवनेश्वरः ओडिशा की राजनीति में एमएमडीआर संशोधन कानून 2026 को लेकर सियासी पारा चरम पर है। इस नए कानून के विरोध में मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने लोक भवन के सामने एक विशाल प्रदर्शन किया। पार्टी का आरोप है कि इस कानून से ओडिशा को 1 लाख करोड़ रुपये के पुराने खनन बकाये और प्रतिवर्ष 10 से 12 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। बीजेडी कार्यकर्ताओं ने काले बैज पहनकर इस कानून को काला कानून करार दिया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

इस बड़े शक्ति प्रदर्शन के दौरान पार्टी के भीतर की आंतरिक कलह और दिग्गजों की गैरहाजिरी चर्चा का मुख्य विषय बन गई। पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए और नवीन निवास से ही स्थिति पर नजर बनाए रखी। इसके अलावा, संगठन सचिव और प्रमुख रणनीतिकार प्रणव प्रकाश दास (बॉबी दास) तथा खनन बहुल क्षेत्र केंदुझर के दिग्गज नेता बद्री नारायण पात्र की अनुपस्थिति ने सबको चौंका दिया। सुंदरगढ़, जाजपुर और कोरापुट जैसे प्रमुख जिलों के कई अन्य विधायक और सांसद भी इस प्रदर्शन से दूरी बनाते नजर आए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बीजेडी दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक गुट केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना चाहता है, जबकि दूसरा धड़ा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सीधा टकराव मोल लेने से बचना चाहता है।

दूसरी ओर, भाजपा ने इस स्थिति का पूरा फायदा उठाते हुए बीजेडी के इस प्रदर्शन को फ्लॉप ड्रामा करार दिया है। भाजपा का कहना है कि जब पार्टी के शीर्ष नेता ही इस आंदोलन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, तो जनता का इस पर विश्वास करना मुश्किल है। कुल मिलाकर, एमएमडीआर कानून ने ओडिशा में आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।