हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी
हाईकोर्ट ने लगाया है निजी जुर्माना
ज्ञानेश कुमार की पुत्री है मेघा रूपम
गलत एनएसए लगाने का दंड दिया
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस हालिया आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है, जिसमें कोर्ट ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम को एक छात्र-कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई हिरासत को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी। उच्च न्यायालय ने डीएम की कार्रवाई को संविधान की शपथ का उल्लंघन बताते हुए इसे मनमाना करार दिया था और 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
अप्रैल में नोएडा में हुए औद्योगिक श्रमिकों के एक प्रदर्शन के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर उन पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई। हालांकि, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उनकी हिरासत को खारिज कर दिया और कहा कि पुलिस के पास उनके खिलाफ कोई ठोस या विश्वसनीय सामग्री नहीं थी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि नौकरशाही की इस तरह की मनमानी और लापरवाही देश और संविधान के प्रति उनके दायित्वों के खिलाफ है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश की बेंच को अवगत कराया कि राज्य सरकार और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट इस उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अलग-अलग अपील दायर करेंगे। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों पर इस प्रकार की सख्त टिप्पणियां और व्यक्तिगत दंड प्रशासनिक मनोबल को प्रभावित कर सकते हैं। इस उच्च-स्तरीय कानूनी लड़ाई से प्रशासनिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर एक नया कानूनी संघर्ष शुरू हो गया है।