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पाकिस्तान की दोहरी नीति से अब शायद तंग आ गया चीन

बिजली डील ने चीन ने अपने हाथ खींच लिये

बीजिंगः चीन और पाकिस्तान के तथाकथित सदाबहार रिश्तों में एक बार फिर बड़ी दरार सामने आई है, जब बीजिंग ने पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी एक प्रमुख और अहम डील से अपने हाथ खींच लिए हैं। चीन के इस कदम से इस्लामाबाद की आर्थिक और कूटनीतिक हलकों में भारी हलचल मच गई है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के तहत ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर सहयोग बढ़ाने की तमाम कोशिशों के बीच बीजिंग का यह फैसला दोनों देशों के बीच कम होते भरोसे और बढ़ती दूरियों की ओर स्पष्ट संकेत करता है।  वैसे समझा जा रहा है कि तीन देशों के नाटो जैसे संगठन बनाने का फैसला भी अब चीन को नागवार गुजरा है और कूटनीतिक तौर पर वह पाकिस्तान के पीछे से अपना समर्थन खींच रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस डील के रद्द होने या ठंडे बस्ते में जाने के पीछे मुख्य रूप से पाकिस्तान की डगमगाती अर्थव्यवस्था, भारी-भरकम विदेशी कर्ज और लगातार गहराता सुरक्षा संकट जिम्मेदार है। पाकिस्तान में काम कर रहे चीनी नागरिकों और इंजीनियरों पर पिछले कुछ समय में हुए आतंकवादी हमलों के कारण बीजिंग में सुरक्षा को लेकर चिंताएं चरम पर हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान पहले से ही चीनी कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है और ऊर्जा क्षेत्र में चीनी कंपनियों के करोड़ों डॉलर के बकाए भुगतान को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पैकेजों के सहारे किसी तरह अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के लिए यह घटना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। इस्लामाबाद सरकार देश के चरमराते पावर सेक्टर को उबारने के लिए लगातार विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही थी। चीन द्वारा बड़े प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाने या हाथ खींचने की इस प्रवृत्ति से यह साफ हो गया है कि बीजिंग अब जोखिम भरे और वित्तीय संकट से घिरे देशों में निवेश करने को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रहा है।