विदेशी मीडिया के बाद इजरायल की स्थानीय मीडिया में भी खबर
खुफिया संस्थाओं ने रिपोर्ट सौंपी थी इसकी
हमास की गतिविधियों की चर्चा थी उनमें
देश के अंदर से इस्तीफे की मांग उठ गयी
येरूशलमः इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक नई मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद भारी राजनीतिक विरोध और जनता के तीखे आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजराइल की खुफिया एजेंसियों ने 7 अक्टूबर 2003 को हमास के भयानक हमलों से कुछ दिन पहले ही नेतन्याहू को आसन्न बड़े खतरे और संभावित हमले की स्पष्ट चेतावनी दी थी। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद देश के भीतर राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में भूचाल आ गया है, और विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
विदेशी और स्थानीय मीडिया में आई इन नई जानकारियों के अनुसार, देश की प्रमुख खुफिया संस्थाओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय को कई ऐसी रिपोर्टें सौंपी थीं जिनमें हमास द्वारा गाजा सीमा के पास किसी बड़े और समन्वित हमले की तैयारी किए जाने के पुख्ता संकेत दिए गए थे। हालांकि, इन चेतावनियों के बावजूद सुरक्षा तंत्र और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से समय रहते कोई ठोस एहतियाती कदम नहीं उठाए गए, जिसका नतीजा 7 अक्टूबर के खूनी नरसंहार के रूप में सामने आया। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद से इजराइली समाज में एक बार फिर उस ऐतिहासिक सुरक्षा चूक को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और नेतन्याहू का रुख इस खुलासे के बाद से इजराइल में नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं और उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी है। विपक्षी नेताओं ने इसे सरकार की आपराधिक नाकामी करार देते हुए तत्काल स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। नेतन्याहू का कहना है कि उन्हें इस स्तर की किसी भी विशिष्ट चेतावनी की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। बहरहाल, इस ताजा विवाद ने युद्ध के बीच नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर एक नया संकट खड़ा कर दिया है।