पेरू में दो शीर्ष मंत्रियों का इस्तीफा
एजेंसियां
लीमा: पेरू की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। अंतरिम राष्ट्रपति जोस मारिया बालकाज़ार द्वारा अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन से एफ-16 लड़ाकू विमानों की खरीद को स्थगित करने के निर्णय के बाद देश के दो प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। रक्षा मंत्री कार्लोस डियाज़ और विदेश मंत्री ह्यूगो डी ज़ेला ने बुधवार को अपने त्याग पत्र सौंपते हुए इस निर्णय पर अपनी गहरी असहमति व्यक्त की।
रक्षा मंत्री डियाज़ ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा, राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा रणनीतिक निर्णय लिया गया है, जिससे मेरा मौलिक मतभेद है। इन इस्तीफों ने पेरू के रक्षा और कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
3.5 बिलियन डॉलर का विवादास्पद सौदा एफ-16 लड़ाकू विमानों की खरीद पेरू में लंबे समय से विवाद का विषय रही है। आलोचकों का तर्क है कि यह महंगा सौदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति पेरू के झुकाव का संकेत है। पिछले हफ्ते, वामपंथी विचारधारा वाले बालकाज़ार ने घोषणा की थी कि वह 3.5 बिलियन डॉलर (लगभग 350 करोड़ डॉलर) के इस भारी-भरकम निवेश का निर्णय देश के अगले निर्वाचित नेता पर छोड़ रहे हैं।
गौरतलब है कि बालकाज़ार फरवरी में ही पद पर आसीन हुए थे, जब कांग्रेस ने महाभियोग की एक लंबी कड़ी के बाद उन्हें अंतरिम राष्ट्रपति चुना था। वह पिछले एक दशक में पेरू के नौवें राष्ट्रपति हैं। पिछले सप्ताह, बालकाज़ार ने अचानक उस हस्ताक्षर समारोह को रद्द कर दिया था जिसमें 12 नए विमानों की पहली खेप का सौदा तय होना था। पेरू अपनी पुरानी पड़ चुकी वायु सेना को आधुनिक बनाने के लिए कुल 24 जेट खरीदने का लक्ष्य बना रहा है।
राष्ट्रपति बालकाज़ार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि वह इस सौदे से पूरी तरह पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि उनका मानना है कि एक संक्रमणकालीन सरकार के लिए इतनी बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता करना सही लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं होगी। उन्होंने कहा, आने वाली सरकार के लिए इतनी बड़ी राशि का बोझ छोड़ना एक खराब परंपरा होगी।
हालांकि, इस निर्णय पर घरेलू स्तर के साथ-साथ अमेरिका ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पेरू में अमेरिकी राजदूत बर्नी नवारो ने 17 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक चेतावनी जारी की। नवारो ने लिखा कि यदि पेरू अमेरिका के साथ दुर्भावना से व्यवहार करता है और अमेरिकी हितों को कमजोर करता है, तो ट्रंप प्रशासन संयुक्त राज्य अमेरिका और इस क्षेत्र की सुरक्षा व समृद्धि की रक्षा के लिए हर उपलब्ध साधन का उपयोग करेगा। यह कूटनीतिक बयान भविष्य में दोनों देशों के संबंधों में तनाव का संकेत दे रहा है।