अब सरकारी खर्च में कटौती की दिशा में बड़ी कोशिश
एजेंसियां
ब्यूनस आयर्स: अर्जेंटीना की लिबरटेरियन सरकार ने बुधवार को कांग्रेस में एक व्यापक चुनावी सुधार विधेयक पेश किया है। राष्ट्रपति जेवियर माइली के नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सरकारी खर्चों में भारी कटौती करना, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और राजनीतिक दलों के नियमों को सख्त बनाना है। इस विधेयक का सबसे विवादास्पद और प्रमुख हिस्सा अनिवार्य प्राथमिक चुनावों को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव है।
यह विधेयक राष्ट्रपति माइली के उस बड़े चुनावी वादे का हिस्सा है, जिसके तहत वह अर्जेंटीना के सरकारी ढांचे और खर्चों को न्यूनतम स्तर पर लाना चाहते हैं। सत्ता में आने के बाद से ही माइली प्रशासन ने विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में गहरी कटौती लागू की है, और अब उनकी नजर चुनावी प्रणाली पर है।
राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में अर्जेंटीना के राष्ट्रीय प्राथमिक चुनावों को एक विफल प्रयोग करार दिया गया है। बयान के अनुसार, इन चुनावों को खत्म करने से उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह से राजनीतिक दलों का आंतरिक मामला बन जाएगा, जिसमें संघीय सरकार की कोई भूमिका या आर्थिक बोझ नहीं होगा। सरकार का तर्क है कि साल 2023 के प्राथमिक चुनावों में सरकारी खजाने पर लगभग 45 अरब अर्जेंटीना पेसो (लगभग 32.7 मिलियन डॉलर) का बोझ पड़ा था, जबकि इन चुनावों से पार्टियों के भीतर के किसी भी महत्वपूर्ण विवाद का समाधान नहीं हुआ।
पिछले कुछ वर्षों में पासो की इस आधार पर आलोचना होती रही है कि ये चुनाव उम्मीदवारों के चयन के बजाय केवल आने वाले आम चुनाव के संभावित परिणामों का एक महंगा सर्वे बनकर रह गए हैं। कई बार इन प्राथमिक चुनावों के अनपेक्षित परिणामों ने अर्जेंटीना के वित्तीय बाजारों में भारी अस्थिरता भी पैदा की है।
देखे गए विधेयक के मसौदे में राजनीतिक दलों को शुरू करने और उन्हें बनाए रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम मानकों को बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में राजनीतिक दलों के वित्तपोषण को लेकर भी कड़े नियम प्रस्तावित हैं। इसमें गुमनाम चंदा लेने, जुआ या सट्टेबाजी से जुड़ी संस्थाओं/व्यक्तियों से धन प्राप्त करने और विदेशी सार्वजनिक संस्थाओं से वित्तीय सहायता लेने पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है। इस सुधार विधेयक को कानून बनने के लिए पहले सीनेट से पारित होना होगा, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए चैंबर ऑफ डेप्युटीज (निचले सदन) में भेजा जाएगा।