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ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर संज्ञान नहीं

टीएमसी के सांसद डेरेक ओब्रायन ने मीडिया को जानकारी दी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः विपक्ष के 193 सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दोनों सदनों में नोटिस दिए जाने के लगभग दो सप्ताह बाद भी इस मामले को संसद के पटल पर स्वीकार नहीं किया गया है। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओब्रायन ने शुक्रवार को कहा कि यह चूक सरकार और चुनाव आयोग के बीच एक गुप्त मिलीभगत को दर्शाती है।

12 मार्च को जमा किए गए इन नोटिसों पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। 10 पन्नों के इस दस्तावेज में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कार्यपालिका के प्रति अधीनस्थ होने और एक संवैधानिक पद की शक्तियों एवं स्थिति का जानबूझकर दुरुपयोग करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

श्री ओब्रायन ने सवाल उठाया, क्या इस सरकार और सीईसी के बीच कोई गुप्त समझ है? उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों सदनों के सचिवालयों ने नोटिस में किसी भी कमी की ओर संकेत नहीं किया है। बजट सत्र 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, ऐसे में उन्होंने कहा कि एक वैध संसदीय कदम को स्वीकार न करके सरकार संसद का मजाक बना रही है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार ने मौजूदा सत्र के दौरान बार-बार संसदीय मानदंडों की अनदेखी की है। पश्चिम एशिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए ओब्रायन ने कहा, प्रधानमंत्री ने दोनों सदनों में अपनी मन की बात की, लेकिन हमारे किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। संसद के पटल पर इस मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय, सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि इस तरह का दृष्टिकोण जवाबदेही से बचने का एक तरीका है।

इसके अलावा, ओब्रायन ने ट्रांसजेंडर बिल 2026, विदेशी अंशदान विनियमन बिल 2026 और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बिल जैसे कई विवादास्पद विधेयकों को विपक्ष की भारी मांग के बावजूद जांच के लिए संसदीय समितियों के पास न भेजने के लिए भी सरकार की आलोचना की।