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अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

टीएमसी के तेवर बदले तो इंडिया गठबंधन आगे बढ़ा

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: इंडिया गठबंधन अगले कुछ दिनों में संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस प्रस्तुत करने की योजना बना रहा है। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर तृणमूल कांग्रेस द्वारा चुनाव निकाय प्रमुख के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। इस नोटिस की मुख्य प्रस्तावक तृणमूल कांग्रेस है, जिसकी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विवादित एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में 6 मार्च से प्रदर्शन कर रही हैं।

तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने एसआईआर के बाद मतदाताओं के मताधिकार के हनन पर चर्चा के लिए दोनों सदनों में नोटिस भी दिए हैं। यदि यह नोटिस प्रस्तुत किया जाता है, तो यह ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने के विपक्षी प्रयास के तुरंत बाद होगा। विपक्षी सूत्रों के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव का मुद्दा तृणमूल की लोकसभा उपनेता शताब्दी रॉय ने मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में उठाया था।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी अपनी वोट चोरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला था और उन पर सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया था। नोटिस का मसौदा तैयार करने का काम अंतिम चरण में है और इसे अगले 2-3 दिनों में पेश किया जा सकता है। विपक्षी रणनीतिकार इस बात पर विचार कर रहे हैं कि प्रस्ताव किस सदन में पेश किया जाए। उन्हें विश्वास है कि उनके पास नोटिस देने के लिए आवश्यक सांसदों की संख्या मौजूद है।

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है। इसके लिए लोकसभा में 100 या राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षरों की आवश्यकता होती है। इसके बाद एक तीन सदस्यीय समिति आरोपों की जांच करती है। यदि समिति दोषी पाती है, तो दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है, जिसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।

हालांकि वर्तमान में विपक्ष के पास मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है, लेकिन वे इसे एक एकजुट प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं ताकि देश के सामने चुनावी विसंगतियों को रखा जा सके। वहीं, समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में भारी अंतर (लगभग 4.5 करोड़) को लेकर अप्रैल में अंतिम सूची आने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है।