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झामुमो के प्रत्याशियों से बदल गयी पूरी राजनीति

भूगोल में बंटी असम की राजनीति, इलाकों में पहचान की लड़ाई

  • हिमंता ने कहा घुसपैठिये नहीं देंगे वोट

  • परिसीमन की चर्चा भर से बदला समीकरण

  • 126 सीटों पर इलाके की राजनीति प्रभावी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम की 126 विधानसभा सीटों पर होने वाला आगामी चुनाव इस बार अत्यंत पेचीदा और बहुआयामी नजर आ रहा है। राज्य के राजनीतिक भूगोल को मुख्य रूप से तीन हिस्सों—निचला असम, ऊपरी असम और मध्य असम (बोडोलैंड सहित)—में विभाजित किया जा सकता है, जहाँ प्रत्येक क्षेत्र का अपना अलग चुनावी चरित्र है। 2023 के परिसीमन के बाद बदली हुई सीट संरचना और पहचान की राजनीति ने समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।

इस बार का मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी असम के चुनावी रण में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। जेएमएम ने चाय बागान क्षेत्रों और आदिवासी बहुल सीटों को लक्ष्य बनाते हुए 21 उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल किए हैं। जेएमएम की यह सक्रियता पारंपरिक वोटों के समीकरण को बिगाड़ सकती है। कुल मिलाकर, परिसीमन के बाद बढ़ी हुई एसटी सीटों और नए मतदाताओं की भागीदारी ने असम के इस दंगल को और भी निर्णायक बना दिया है।

ऊपरी असम (35 सीटें): यह क्षेत्र भाजपा का अभेद्य किला माना जाता है। 2021 में एनडीए ने यहाँ की 85.7% सीटों पर कब्जा किया था। तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जैसे जिलों वाले इस क्षेत्र में परिसीमन के बाद जनजातीय प्रभाव बढ़ने से भाजपा अपनी स्थिति और मजबूत मान रही है।

निचला असम (50 सीटें): बांग्लादेश सीमा से सटे धुबरी और बारपेटा जैसे मुस्लिम बहुल जिलों वाले इस क्षेत्र में मुकाबला बराबरी का है। यहाँ कांग्रेस और एआईयूडीएफ का अच्छा प्रभाव है, जहाँ पिछले चुनाव में विपक्षी गठबंधन ने 54 फीसद सीटें जीती थीं। मध्य असम (41 सीटें): नगांव और बोडोलैंड क्षेत्र वाला यह हिस्सा सत्ता का टर्निंग पॉइंट है। यहाँ क्षेत्रीय दल जैसे यूपीपीएल और बीपीएफ किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनावी माहौल को गरमाते हुए कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को छोड़कर राज्य का कोई भी मूल भारतीय कांग्रेस को वोट नहीं देगा। सरमा ने तंज कसते हुए यहाँ तक कह दिया कि कांग्रेस शायद भारत के बजाय पड़ोसी देशों में सरकार बनाने की स्थिति में है।