अमेरिका की धमकियों के बावजूद भारत की स्वतंत्र विदेश नीति
नईदिल्लीः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी भरकम आयात शुल्क के बावजूद, भारत अपनी नीतियों से डिगा नहीं है। भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहने का संकल्प दोहराया है, जिसका एक स्पष्ट प्रमाण यह है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ब्रिक्स की आभासी बैठक में भाग लेंगे।
इसके साथ ही, रूसी कच्चे तेल की खरीद पर भी भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुसार रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। सीतारमण ने यह बात तब कही जब भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव गहराता जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह से मूल्य, रसद और राष्ट्रीय हितों पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि चाहे रूसी तेल हो या कुछ और, यह हमारा अधिकार है कि हम वहीं से खरीदें जहां से हमारी जरूरतें पूरी होती हों। उन्होंने जोर दिया कि कच्चे तेल जैसी बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च वाली वस्तु में भारत को वह विकल्प चुनना होगा जो उसके लिए सबसे बेहतर हो।
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगाया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन प्रभावों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधारों से कुछ हद तक संतुलित किया जा सकेगा, जिसमें कई वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष कर दरों को कम और सरल किया गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी तेल ने पिछले तीन वर्षों में भारत को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद की है।
इस बीच, ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी आयात शुल्क पर एक सामूहिक रणनीति बनाने के लिए 8 सितंबर को ब्रिक्स देशों की एक आभासी बैठक बुलाने का आह्वान किया है। भारत और ब्राजील पर सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए गए हैं। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस बैठक में भाग लेंगे।
नई दिल्ली का मानना है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) जैसे संगठन पश्चिमी-विरोधी नहीं, बल्कि गैर-पश्चिमी मंच हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई में धमकी दी थी कि इन देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।