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जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री से चर्चा की

युद्ध जारी रहने के बीच भारतीय कूटनीतिक प्रयास तेज

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार शाम को अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के साथ पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष पर विस्तृत चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी टेलीफोनिक बातचीत थी। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने क्षेत्र के नवीनतम घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया और भविष्य में भी संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्र में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की नाकेबंदी और तेल बुनियादी ढांचों पर हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। जयशंकर ने अराघची को भारत की गहरी चिंताओं से अवगत कराया और तनाव कम करने के लिए बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की। भारत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

यह चर्चा ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के ठीक बाद हुई है, जहाँ पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई ने कार्यभार संभाला है। संघर्ष की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खाड़ी देशों में भारतीय नाविकों की जान जाने की खबरें भी सामने आई हैं। जयशंकर ने संसद में दिए अपने बयान में भी जोर दिया था कि भारत इस युद्ध में शांति का पक्षधर है। भारत सरकार लगातार तेहरान स्थित अपने दूतावास के संपर्क में है ताकि वहां फंसे छात्रों और अन्य भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके या उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा सके।