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केदारनाथ के रास्ते पर पहाड़ टूटकर नीचे गिरा

पहले से सतर्कता होने की वजह से फिर टला बड़ा हादसा

वर्ष 2013 के बाद से सतर्कता जारी

यात्रा को तत्काल प्रभाव से रोका गया

चीरबासा हेलीपैड के पास की घटना है

राष्ट्रीय खबर

देहरादूनः उत्तराखंड के केदारनाथ में एक बार फिर प्रकृति का तांडव देखने को मिला है। केदारनाथ के पास चीरबासा हेलीपैड के समीप अचानक पहाड़ से एक बड़ा पत्थर नीचे लुढ़क कर आ गिरा। इसकी चपेट में आने से एक तीर्थयात्री की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस दुर्घटना के बाद खराब मौसम और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के खतरे को देखते हुए केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, चीरबासा हेलीपैड के पास पहाड़ से गिरे विशाल पत्थर की चपेट में आने से जिस व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हुई, वह पास ही के ऊखीमठ का रहने वाला था। लगभग 65 वर्ष की आयु वाले इस मृतक का नाम मदन मोहन तिवारी था।

मूसलाधार बारिश के चलते पिछले कुछ दिनों से केदारनाथ की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। तीर्थयात्रा के रास्ते में विभिन्न स्थानों पर ऊपर से गिरे पत्थर, पानी के साथ बहकर आया कचरा और मलबा जमा हो गया है, जिससे मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने फिलहाल यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर स्थिति सामान्य होने तक यात्रियों को सोनप्रयाग या गौरीकुंड में ही रुकने के लिए कहा है। वहीं, जो लोग केदारनाथ से वापस लौट रहे थे, उन्हें जंगलचट्टी में रोक दिया गया है।

फिलहाल प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, तब तक कोई भी उस रास्ते पर आगे न बढ़े। प्रशासन की हरी झंडी मिलने के बाद ही यात्रा को दोबारा शुरू किया जाएगा। खराब मौसम के कारण पहाड़ों में भूस्खलन होने का जोखिम बहुत अधिक बढ़ गया है, इसलिए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन पूरी स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और मौसम तथा रास्ते के हालात की समीक्षा करने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।

ताजा खबरों के मुताबिक, इस घटना के तुरंत बाद एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय आपदा प्रबंधन दल ने बचाव अभियान शुरू कर दिया। यात्रियों को धीरे-धीरे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सोमवार सुबह से मौसम में कुछ सुधार होने और बारिश रुकने के बाद पत्थरों का गिरना बंद हो गया है, लेकिन जब तक मार्ग पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, यह प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रशासन की अंतिम अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति को उस मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बता दें कि साल 2013 की केदारनाथ आपदा की यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। उस वर्ष 16-17 जून को केदारनाथ में बादल फटने और केदारनाथ मंदिर के ठीक ऊपर स्थित चोराबाड़ी ग्लेशियर झील के फटने से पानी, कीचड़ और पत्थरों का एक विशाल सैलाब आ गया था, जो सब कुछ अपने साथ बहा ले गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस आपदा में 5,700 से अधिक लोगों की जान चली गई थी या वे लापता हो गए थे। उस भयानक घटना के बाद से ही प्रशासन प्रकृति और यात्रा को लेकर बेहद सतर्क रहता है।