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थाली से अब गायब हो सकता है डोसा

सरकारी एलान से देश के व्यापार को भरोसा नहीं हो पा रहा

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध का सीधा असर अब भारत की रसोई और रेस्तरां उद्योग पर पड़ने लगा है। मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी किल्लत देखी जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि अगर आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो मुंबई के लगभग 50 प्रतिशत होटलों पर ताला लटकने की नौबत आ सकती है। इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (एएचएआर) के अनुसार, वर्तमान में लगभग 20 प्रतिशत होटल पहले से ही प्रभावित हैं और उन्होंने अपने मेनू से कई व्यंजनों को हटाना शुरू कर दिया है।

पुणे होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेश शेट्टी ने एक चिंताजनक पहलू की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस गैस संकट की सबसे बड़ी मार डोसा पर पड़ सकती है। उन्होंने समझाया कि डोसा बनाने के लिए लोहे के तवे को लगातार गर्म रखना पड़ता है, जिसमें गैस की भारी खपत होती है। यदि सरकार गैस की राशनिंग शुरू करती है, तो होटलों के पास उन डिशेज को बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा जिनमें ज्यादा ईंधन लगता है। चेन्नई और बेंगलुरु में कई रेस्तरां ने पहले ही अपने परिचालन को सीमित कर दिया है और केवल कम गैस खपत वाले व्यंजन ही परोस रहे हैं।

गैस की यह कमी केवल होटलों तक ही सीमित नहीं है; पुणे में स्थानीय प्रशासन ने गैस आधारित श्मशान घाटों को भी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्रोपेन और ब्यूटेन के उपयोग पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं, क्योंकि सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू उपयोग के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इस बीच, आगामी इंडियन प्रीमियर लीग पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष अरुण धूमल ने कहा है कि वे स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं और जरूरत पड़ने पर उचित निर्णय लिया जाएगा। यह संकट न केवल खाद्य उद्योग, बल्कि उनसे जुड़े हजारों कामगारों की आजीविका के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है।