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शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष बनाये गये बादल

पार्टी को खत्म करने की साजिश हुईः सुखबीर

  • अकाल तख्त ने तनखैया घोषित किया था

  • उनपर जानलेवा हमला भी किया गया था

  • श्री दरबार साहिब परिसर में आयोजित चुनाव

राष्ट्रीय खबर

अमृतसर: सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को कहा कि शिरोमणि अकाली दल और उसके नेतृत्व को खत्म करने के लिए एक साजिश रची गई थी और आरोप लगाया कि 2020 में पार्टी के एनडीए से बाहर निकलने के बाद यह साजिश शुरू हुई। सुखबीर सिंह बादल शनिवार को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने के साथ ही पार्टी की कमान संभाल ली।

यह पार्टी लगातार हार और घटते वोट शेयर के कारण संघर्ष कर रही है। 62 वर्षीय पूर्व उपमुख्यमंत्री को पहली बार 2008 में पार्टी अध्यक्ष चुना गया था – वे इस पद पर आसीन होने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे।

अमृतसर में संगठन के आम प्रतिनिधि सत्र में उनका पुनः निर्वाचन, उनके इस्तीफा देने के बमुश्किल चार महीने बाद हुआ है, जब 2007 से 2017 तक शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) और उसकी सरकार द्वारा की गई गलतियों के लिए अकाल तख्त द्वारा उन्हें तनखैया घोषित किया गया था। पिछले वर्ष दिसंबर में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में तपस्या करते समय एक पूर्व खालिस्तानी आतंकवादी द्वारा की गई हत्या की कोशिश में बादल बाल-बाल बच गए थे।

पार्टी के चुनाव अधिकारी गुलजार सिंह रानिके द्वारा नए अध्यक्ष के रूप में उनके नाम की घोषणा के बाद बादल ने कहा, मुझे यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं। मैं लोगों से वादा करता हूं कि पंजाब को फिर से नंबर एक राज्य बनाया जाएगा। दिवंगत पार्टी संरक्षक प्रकाश सिंह बादल के पुत्र बादल, शिअद अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार थे।

पार्टी के भीतर असंतोष के बीच पार्टी की राजनीतिक किस्मत को पुनर्जीवित करना बादल के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। शिअद के नये अध्यक्ष के चुनाव के लिए सत्र अमृतसर में श्री दरबार साहिब परिसर के तेजा सिंह समुंदरी हॉल में आयोजित किया गया।

बादल का नाम पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ ने प्रस्तावित किया, जबकि पार्टी नेता परमजीत सिंह सरना और महेश इंदर सिंह ग्रेवाल ने इसका समर्थन किया। इस अवसर पर बादल की पत्नी एवं बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल, पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया और दलजीत सिंह चीमा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। 104 साल पुराना शिअद संकट का सामना कर रहा है, क्योंकि बादल के नेतृत्व में पिछले कई वर्षों से उसका राजनीतिक भाग्य कमजोर होता जा रहा है।