स्वीडन की पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया
एजेंसियां
स्टॉकहोमः स्वीडन इन दिनों भीषण गैंगवार (गिरोहबाजी की हिंसा) के दौर से गुजर रहा है, जिसका सबसे भयावह पहलू बेगुनाह नागरिकों की मौत है। स्वीडिश पुलिस द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में गैंगवार की गोलीबारी में 23 निर्दोष राहगीर मारे गए हैं और 30 अन्य घायल हुए हैं। ये आंकड़े स्वीडन में हिंसक अपराधों पर लगाम लगाने की देश की जद्दोजहद को उजागर करते हैं।
स्वीडन पिछले एक दशक से अधिक समय से नशीली दवाओं के बाजार पर नियंत्रण और आपसी रंजिश के कारण होने वाली गैंग हिंसा को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है। पुलिस के अनुसार, इन घटनाओं के शिकार होने वाले निर्दोष लोगों में वे शामिल हैं जो आवारा गोलियों की चपेट में आ गए, या जिन्हें पहचान की गलती के कारण निशाना बनाया गया, और कुछ मामलों में गिरोह के सदस्यों के रिश्तेदारों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है।
स्वीडिश पुलिस के राष्ट्रीय परिचालन विभाग के समन्वयक अलेक्जेंडर वालेनियस ने समाचार एजेंसी TT को बताया कि बड़ी संख्या में आम नागरिकों के घायल होने का एक मुख्य कारण यह है कि हमलावर बहुत कम उम्र के हैं। वालेनियस ने कहा, हम ऐसे बहुत युवा अपराधियों से निपट रहे हैं जिनके पास हिंसक अपराधों का कोई पूर्व अनुभव नहीं है। अनुभवहीन होने के कारण इस बात का अधिक जोखिम रहता है कि वे गलत लक्ष्य या किसी तीसरे पक्ष को गोली मार दें।
स्वीडिश गिरोह अक्सर किशोरों की भर्ती के लिए सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का उपयोग करते हैं, जिन्हें अपराध करने के लिए पैसे दिए जाते हैं। अक्सर ये भर्ती किए गए बच्चे 15 वर्ष से कम आयु के होते हैं, जो स्वीडन में आपराधिक जिम्मेदारी की कानूनी आयु है। इसका मतलब है कि उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और वे सामाजिक सेवाओं की जिम्मेदारी बन जाते हैं, जो उन्हें गिरोहों के लिए एक मूल्यवान संपत्ति बनाता है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वीडन की वर्तमान अल्पमत दक्षिणपंथी सरकार ने अपराध और अप्रवासन पर नकेल कसने के लिए कड़े प्रस्ताव पेश किए हैं। आगामी 13 सितंबर के आम चुनावों को देखते हुए सरकार ने हाल ही में टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिए कानून लाने की योजना बनाई है। इसके तहत गिरोहों द्वारा पोस्ट किए गए मर्डर विज्ञापनों को एक घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा, अन्यथा भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, गंभीर अपराधों के लिए आपराधिक जिम्मेदारी की आयु को 15 से घटाकर 13 वर्ष करने पर भी विचार किया जा रहा है।