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भाजपाई बने सांसदों के उत्पीड़न की आशंका जतायी

राघव चड्डा ने आनन फानन में राष्ट्रपति से की मुलाकात

  • पंजाब सरकार की शिकायत की है

  • राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपा

  • दलबदल के बाद अब भयभीत है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार, 5 मई 2026 को देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। श्री चड्ढा ने पंजाब की अपनी ही पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला उन सांसदों से जुड़ा है जिन्होंने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी और राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के साथ अपना विलय कर लिया था।

राघव चड्ढा के नेतृत्व में तीन अन्य सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को एक विस्तृत मांग पत्र (मेमोरेंडम) सौंपा, जिसमें पंजाब सरकार द्वारा उनके खिलाफ की जा रही कथित दमनकारी कार्रवाइयों का विवरण दिया गया है। श्री चड्ढा ने आरोप लगाया कि जैसे ही इन सांसदों ने आप छोड़कर भाजपा का दामन थामा, पंजाब पुलिस और अन्य राज्य एजेंसियों ने उन्हें और उनके सहयोगियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए राघव चड्ढा ने कहा, लोकतंत्र में असहमति और दल बदलने का अधिकार संवैधानिक है, लेकिन किसी सांसद को उसके राजनैतिक निर्णय के लिए प्रताड़ित करना प्रतिशोध की राजनीति की पराकाष्ठा है। पंजाब सरकार सत्ता के अहंकार में अंधी होकर विपक्षी नेताओं के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कर रही है और उनके परिवारों को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों को रोक दिया गया है और उनके सुरक्षा घेरे में भी कटौती की गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि सांसदों के विशेषाधिकारों की रक्षा की जा सके। श्री चड्ढा ने जोर देकर कहा कि राज्य मशीनरी का इस्तेमाल राजनैतिक हिसाब बराबर करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक कलह की खबरें आ रही थीं, जिसके परिणामस्वरूप कई बड़े चेहरों ने पार्टी से किनारा कर लिया है। अब इन सांसदों द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों ने पंजाब की राजनीति के साथ-साथ केंद्र और राज्य के संबंधों में भी तनाव पैदा कर दिया है।