करीब तीस लाख साल पहले आदिमानव का एक भक्षक था
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इस सरीसृप का नामकरण भी किया गया
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थूथन पर विशिष्ट उभार से पहचाना गया
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घात लगाकर हमला किया करता था यह
राष्ट्रीय खबर
रांचीः करीब तीन मिलियन (30 लाख) साल से भी पहले, मानव विकास के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाने वाली ‘लूसी’ और उसके पूर्वज पूर्वी अफ्रीका के जिस परिदृश्य में रहते थे, वहां एक अत्यंत खतरनाक शिकारी भी मौजूद था। नदियों और झीलों की गहराई में छिपा एक विशाल मगरमच्छ, जिसकी थूथन पर एक विशिष्ट उभार था, संभवतः इन प्राचीन होमिनिन के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक था।
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यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के नेतृत्व वाली एक टीम ने इस सरीसृप की पहचान एक नई प्रजाति के रूप में की है। जर्नल ऑफ सिस्टेमेटिक पैलियोन्टोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इस मगरमच्छ को औपचारिक रूप से क्रोकडायलूस लुसिविनेटर नाम दिया है, जिसका अर्थ है लूसी का शिकारी। यह नाम इतिहास में इस जीव के स्थान को दर्शाता है। यह मगरमच्छ 3.4 मिलियन से 3 मिलियन साल पहले इथियोपिया के उसी क्षेत्र में रहता था, जहाँ लूसी और उसकी प्रजाति, ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफरेंसिस का निवास था।
1974 में खोजी गई लूसी मानव विकास के सबसे महत्वपूर्ण जीवाश्मों में से एक है। नई खोजी गई मगरमच्छ की प्रजाति लगभग 12 से 15 फीट लंबी थी और इसका वजन 600 से 1,300 पाउंड के बीच रहा होगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह एक घात लगाकर शिकार करने वाला शिकारी था, जो पानी में छिपकर शिकार के आने का इंतजार करता था। आयोवा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर क्रिस्टोफर ब्रोकू का कहना है, उस पारिस्थितिकी तंत्र में यह सबसे बड़ा शिकारी था, जो शेरों और लकड़बग्घों से भी अधिक खतरनाक था। यह निश्चित है कि यह मगरमच्छ लूसी की प्रजाति का शिकार करता रहा होगा।
इस मगरमच्छ की सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक उसकी थूथन के बीच में स्थित एक उभार था। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उभार संभवतः प्रेमालाप प्रदर्शन में भूमिका निभाता था। वैज्ञानिकों ने इथियोपिया के अफर क्षेत्र के हदार फॉर्मेशन से मिले 121 जीवाश्म अवशेषों का विश्लेषण करके इस नई प्रजाति की पहचान की है। हदार क्षेत्र मानव उत्पत्ति को समझने के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है, जिसे 1980 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। यह खोज न केवल प्राचीन वन्यजीवों के बारे में जानकारी देती है, बल्कि उस कठिन वातावरण पर भी प्रकाश डालती है जिसमें हमारे पूर्वजों ने जीवित रहने के लिए संघर्ष किया था।
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