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निशिकांत दुबे के साथ बैठे नजर आ गये टीएमसी के सत्रह विधायक

बागी गुट ने फिर किया 22 के समर्थन का दावा

  • भूपेंद्र यादव के यहां एकत्रित हुए थे सभी

  • दावा के बाद भी सांसदों की संख्या नहीं दिखी

  • ओम बिड़ला से मिल आया है यह बागी गुट

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी घमासान रविवार को उस समय और तेज हो गया जब बागी खेमे की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि अब उनके साथ 22 सांसद हो गए हैं। यह समूह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर खुद को एक अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता देने की मांग कर चुका है।

इस बागी खेमे को उस समय बड़ी मजबूती मिली, जब वरिष्ठ टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने औपचारिक रूप से इनके साथ जुड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि ममता बनर्जी पार्टी में केवल सलाहकार की भूमिका में रहें। सुदीप बंदोपाध्याय, जो दिल्ली में टीएमसी का प्रमुख चेहरा रहे हैं, ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद यह घोषणा की। इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया में आयी है, जिसमें बागी गुट के 17 विधायक निशिकांत दुबे के साथ बैठे नजर आ रहे हैं। इनमें सायनी घोष नहीं हैं।

कोलकाता से दिल्ली रवाना होने से पहले काकोली घोष दस्तीदार ने पत्रकारों से कहा था, हम दिल्ली जा रहे हैं, हमारे साथ 22 सांसद हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने हमें समय दिया है। हम उनसे मिलकर अलग गुट के रूप में मान्यता की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग पिछले चार-पांच वर्षों में पश्चिम बंगाल में बनी स्थिति के खिलाफ ईमानदारी से अपनी आवाज उठाना चाहते थे, वे हमारे संपर्क में हैं।

इस बीच, टीएमसी ने पार्टी में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करते हुए बागी नेताओं पर कार्रवाई की है। पार्टी ने सायनी घोष, माला रॉय और सुदीप बंदोपाध्याय को प्रमुख पदों से हटा दिया है। सायनी घोष की जगह अर्नब बनर्जी को तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है, वहीं कलिगंज की विधायक अलीफा अहमद को महिला विंग की कमान सौंपी गई है। कुणाल घोष को सुदीप बंदोपाध्याय की जगह उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया है।

बागी गुट का दावा है कि उनका उद्देश्य केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का समर्थन करना है। शुक्रवार को 19 टीएमसी सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज भी सामने आया था, जो अलग संसदीय गुट बनाने के प्रयासों का समर्थन करता है। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष के सचिवालय से अभी तक इस पत्र की प्राप्ति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पार्टी के भीतर यह संकट विधानसभा चुनावों के बाद और गहरा गया है, जहाँ सांसदों का एक बड़ा वर्ग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से अलग हो गया है। दूसरी तरफ यह आरोप भी सच साबित हुआ है कि इस विद्रोह के पीछे भाजपा के गोड्डा विधायक निशिकांत दुबे की सक्रिय भूमिका है।