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अमित शाह के बयान की मांग पर कार्यवाही ठप

ऊपरी सदन में फिर से चर्चा के पहले ही मच गया हंगामा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में माहौल बेहद गरमाया रहा। जहाँ एक तरफ लोकसभा में विपक्षी सांसद परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने और अनुचित साधनों पर लगाम लगाने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में हिस्सा ले रहे थे, वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तत्काल बयान और जवाब की मांग करते हुए अपना विरोध तेज कर दिया। इस लगातार बढ़ते हंगामे और नारेबाजी के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बिना कोई ठोस कामकाज किए स्थगित कर दी गई। दिन भर में दो सत्रों में उच्च सदन की कार्यवाही कुल मिलाकर मात्र 10 मिनट ही चल सकी — सुबह के सत्र में सात मिनट और दोपहर के सत्र में केवल तीन मिनट।

सदन में नारेबाजी और पहला स्थगन: प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई हिंसक पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी सांसद लामबंद होकर वेल में आ गए और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्ष की एक ही मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आकर इस संवेदनशील मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करें। सभापति ने हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही को पहले दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

दोपहर 2 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026  को पटल पर पेश किया। विपक्ष का विरोध और हंगामा इतना उग्र था कि सदन की कार्यसूची में शामिल राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार नहीं किया जा सका। यह विधेयक राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का अपमान करने पर कठोर दंड का प्रावधान करता है। विपक्षी दलों के कड़े रुख और गृह मंत्री के बयान की अटूट मांग के कारण राज्यसभा में दिनभर का सूचीबद्ध कामकाज पूरी तरह ठप रहा।