चाय पर चर्चा की पहल हुई है ज्ञानेश कुमार की तरफ से
अब भी संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस से दूरी
बैठक के बाद बंद कमरे में चर्चा
सभी को हर बात की जानकारी होगी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः देश के चुनाव आयोग के भीतर पिछले कुछ दिनों से चले आ रहे कथित तनाव और मतभेदों पर आखिरकार बर्फ पिघलती नजर आ रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दोनों चुनाव आयुक्तों—डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी—को अपने कार्यालय में चाय पर आमंत्रित किया। इस अनौपचारिक मुलाकात के दौरान तीनों शीर्ष अधिकारियों ने काफी समय तक साथ बैठकर बातचीत की और माहौल को सामान्य बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यह महत्वपूर्ण पल शनिवार को दोपहर तीन बजे आयोग की एक अहम बैठक समाप्त होने के बाद आया। बैठक के तुरंत बाद, मुख्य चुनाव आयुक्त ने पहल करते हुए दोनों सहयोगियों को अपने कक्ष में चाय के लिए बुलाया। हालांकि चर्चा के दौरान माहौल काफी हद तक सहज और सामान्य दिखाई दिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों और अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि डॉ. संधू की नाराजगी पूरी तरह से खत्म होने में थोड़ा वक्त और लग सकता है, जबकि डॉ. जोशी के साथ स्थिति काफी हद तक सामान्य हो चुकी है। फिर भी, इस बात पर पूर्ण सहमति बन गई है कि आयोग के कामकाज को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
हालिया समय में उठे विवादों और चर्चाओं से सबक लेते हुए, चुनाव आयोग ने यह तय किया है कि भविष्य में संस्थान की गरिमा और कार्यप्रणाली को बनाए रखने के लिए हर एक महत्वपूर्ण निर्णय पूरी तरह से सर्वसम्मति से ही लिया जाएगा। किसी भी फैसले में आपसी तालमेल की कमी या संवादहीनता की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। इसकी शुरुआत शनिवार की बैठक से ही कर दी गई है, जहां बैठक आयोजित होने से पहले ही दोनों चुनाव आयुक्तों को सभी जरूरी एजेंडे और दस्तावेज विधिवत रूप से भेज दिए गए थे, ताकि पारदर्शी तरीके से चर्चा हो सके और भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या मतभेद की कोई गुंजाइश न बचे।
इस आंतरिक तनाव और प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच कुछ नीतिगत मामलों पर असर भी देखने को मिला है। उदाहरण के लिए, हाल ही में राजधानी दिल्ली में लगभग 33 लाख मतदाताओं को छोटी-मोटी त्रुटियों और गलतियों के सिलसिले में नोटिस थमाने के जो निर्देश दिए जाने थे, वे प्रक्रियागत और आपसी चर्चाओं में देरी के कारण कुछ दिन पीछे हो गए। हालांकि, अब तीनों आयुक्तों के बीच बनी नई सहमति और बेहतर तालमेल के बाद आयोग के सभी अटके हुए कार्यों में तेजी आने की पूरी उम्मीद है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं और अधिक सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेंगी।