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नीरव मोदी का प्रत्यर्पण आदेश मैंने जारी किया थाः प्रीति पटेल

पूर्व ब्रिटिश गृह मंत्री के ताजा बयान से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी

एजेंसियां

नईदिल्लीः ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने एक हालिया साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि वह यह जानकर स्तब्ध और अत्यधिक व्यथित हैं कि भगोड़ा नीरव मोदी अभी भी यूनाइटेड किंगडम में ही रह रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में यूके की एक अदालत द्वारा नीरव मोदी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित किए जाने के बाद, प्रीति पटेल ने स्वयं उसके भारत प्रत्यर्पण आदेश पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए थे।

कंजर्वेटिव पार्टी की वरिष्ठ सांसद और वर्तमान में कंजर्वेटिव पार्टी की शैडो फॉरेन सेक्रेटरी प्रीति पटेल ने एक विशेष पॉडकास्ट में इस भगोड़े हीरा कारोबारी के विषय में विस्तृत बातचीत की। उन्होंने दावा किया कि नई दिल्ली (भारत सरकार) ने ब्रिटेन में मौजूद हजारों अवैध भारतीय प्रवासियों को वापस स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, क्योंकि ब्रिटेन की सरकार अब तक नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण करने में विफल रही है। नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक के लगभग 2 अरब डॉलर के बहुचर्चित ऋण घोटाले और उससे जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के गंभीर आपराधिक आरोपों में मुकदमे का सामना करने के लिए वांछित है।

प्रीति पटेल ने अपनी कानूनी व प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, यदि हमारी व्यवस्था न्यायसंगत होती और केवल जटिल प्रक्रियाओं और बहानों में उलझने के बजाय सही निर्णय ले रही होती, तो नीरव मोदी को आज इस देश (ब्रिटेन) में नहीं होना चाहिए था। मुझे वास्तव में बेहद हैरानी और दुख है कि वह अब भी यहीं है। मुझे यह स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं कि इस देरी के कारण भारत सरकार हमारे साथ मिलकर काम करने को लेकर काफी हतोत्साहित और निराश महसूस कर रही होगी। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पटेल ने खुलासा किया कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच कंजर्वेटिव पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार में गृह मंत्री के रूप में कार्य करते समय, नीरव मोदी के इस मामले ने उनके लिए कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अत्यधिक मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। उन्होंने बताया कि वीज़ा अवधि खत्म होने के बाद भी ब्रिटेन में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों को वापस लेने के मुद्दे पर भारत सरकार सख्त रुख अपना रही थी।

जब तक भारतीय अधिकारियों ने उन मामलों पर कोई ठोस प्रगति और सीधी कार्रवाई नहीं देखी, तब तक उन्होंने हमारे खिलाफ इस मुद्दे का इस्तेमाल एक रणनीतिक दबाव के रूप में किया, जो एक गृह मंत्री के रूप में मेरे लिए बेहद निराशाजनक स्थिति थी।