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जोजिला टनल में और 210 मीटर का काम बाकी

एशिया के सबसे लंबी सुरंग का निर्माण कार्य अंतिम चरण में

  • हर मौसम में चालू रहेगा यह रास्ता

  • तेरह किलोमीटर से अधिक लंबी सुरंग

  • भारतीय सेना को भी होगा इससे फायदा

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः लद्दाख और कश्मीर घाटी के बीच हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करने वाली महत्वाकांक्षी जोजिला सुरंग का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है। 13.15 किलोमीटर लंबी यह सुरंग पूर्ण ब्रेकथ्रू (आर-पार खुदाई) से मात्र 210 मीटर दूर है। उम्मीद जताई जा रही है कि जून के पहले सप्ताह तक खुदाई का यह ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। लगभग 4,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना एशिया की सबसे लंबी द्वि-दिशीय सड़क सुरंग बनने जा रही है।

वर्तमान में लद्दाख के निवासी, विशेषकर कारगिल और द्रास के लोग, सर्दियों में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण साल में लगभग छह महीने शेष भारत से कटे रहते हैं। यह सुरंग श्रीनगर-लद्दाख राजमार्ग पर जोजिला दर्रे पर होने वाले हिमस्खलन और भूस्खलन के खतरों को खत्म कर देगी। निर्माण प्रबंधक मेहराज उद्दीन लोन के अनुसार, लद्दाख (पूर्वी पोर्टल) की ओर से खुदाई और लाइनिंग का काम तेजी से चल रहा है। गंदेरबल (पश्चिमी पोर्टल) की ओर से भी 24 घंटे काम जारी है, हालांकि पूर्वी पोर्टल पर अत्यधिक कम तापमान और कठिन भूवैज्ञानिक स्थितियां बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं।

मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा बनाई जा रही इस सुरंग में सुरक्षा के लिए आधुनिक न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का उपयोग किया जा रहा है। सुरंग के भीतर 6 किमी से अधिक गहराई तक बिजली आपूर्ति बनाए रखना और पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करना एक बड़ा तकनीकी कार्य है। इस परियोजना में 1,400 से अधिक कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें से 79 प्रतिशत स्थानीय लोग हैं। जनवरी 2023 में हिमस्खलन जैसी आपदाओं और जान-माल के नुकसान के बावजूद इंजीनियरों ने काम की गति को बनाए रखा है।

रणनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों और भारी उपकरणों की त्वरित तैनाती में मदद करेगी। स्थानीय निवासियों के लिए यह सुरंग किसी वरदान से कम नहीं है। द्रास के निवासियों का कहना है कि अब उन्हें आपातकालीन स्थिति में लेह से हवाई मार्ग का सहारा नहीं लेना पड़ेगा और पर्यटन के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी साल भर बनी रहेगी। हालांकि पूरी परियोजना के अंतिम रूप से पूरा होने की समयसीमा फरवरी 2028 तक बढ़ा दी गई है, लेकिन जून में होने वाला ब्रेकथ्रू इस दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।