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टीवीके की सरकार बनने के बाद अन्नाद्रमुक को लगा झटका

पार्टी के तीन विधायकों ने इस्तीफा दिया

  • 25 विधायकों ने सरकार का समर्थन किया

  • पार्टी में सुलह की गुपचुप कोशिशें जारी है

  • कुछ लोग पलानीस्वामी से भी जाकर मिले

राष्ट्रीय खबर

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया, जब अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) के तीन बागी विधायकों ने आधिकारिक तौर पर विधानसभा से अपना इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा सौंपने वाले विधायकों में पेरुंदुरई निर्वाचन क्षेत्र से एस जयकुमार, मदुरंतकम (अनुसूचित जाति आरक्षित सीट) से मरगतम कुमारवेल और धारापुरम (अनुसूचित जाति आरक्षित सीट) से पी सत्यभामा शामिल हैं। इन तीनों नेताओं ने सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) जे. सी. डी. प्रभाकर से मुलाकात कर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंपा।

यह राजनीतिक घटनाक्रम इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ये तीनों विधायक ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के भीतर चल रहे सी. वे. शनमुगम और एस. पी. वेलुमनी के उस शक्तिशाली बागी खेमे का हिस्सा थे, जिसने हाल ही में हुए विधानसभा के विश्वास मत के दौरान पार्टी लाइन से अलग जाकर सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कड़गम सरकार के पक्ष में मतदान किया था। इस बागी गुट में कुल 25 विधायक शामिल थे, जिन्होंने सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

अन्नाद्रमुक के अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन तीनों विधायकों के इस्तीफे के पीछे एक सोची-समझी रणनीतिक डील है। दरअसल, तमिलगा वेत्री कड़गम के मुख्य समन्वयक और मौजूदा सरकार में मंत्री के. ए. सेंगोट्टइयन ने इन बागी विधायकों को एक बड़ा राजनीतिक आश्वासन दिया था। इस समझौते के तहत सेंगोट्टइयन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि आने वाले समय में होने वाले विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले उन्हें औपचारिक रूप से टीवीके में शामिल किया जाएगा। इतना ही नहीं, पार्टी उन्हें उन्हीं के पुराने और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों (पेरुंदुरई, मदुरंतकम और धारापुरम) से दोबारा चुनावी मैदान में उम्मीदवार बनाकर उतारेगी। इसी भविष्य की राजनीतिक सुरक्षा के वादे के बाद तीनों ने अपनी विधायकी छोड़ने का फैसला किया।

दूसरी तरफ, इस बड़े झटके के बीच मुख्य विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक में एक समानांतर सकारात्मक हलचल भी देखने को मिली है। पार्टी के भीतर असंतुष्टों को मनाने और बिखरते कुनबे को जोड़ने के लिए चलाए जा रहे व्यापक सुलह-समझौते और पुनर्मिलन अभियान को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। इसी कड़ी में बागी खेमे के कई अन्य विधायकों ने पाला बदलते हुए वापस मुख्यधारा में लौटने के संकेत दिए हैं।

पार्टी में पुनर्मिलन और एकजुटता की इस नई बयार की पुष्टि तब हुई जब बागी गुट से नाता तोड़कर तीन प्रमुख विधायकों ने अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के प्रति अपनी निष्ठा दोबारा व्यक्त की। अंथियूर से विधायक पी. हरिभास्कर, पन्मुटी से विधायक एस. मोहेन और आर्कोट से विधायक एस. एम. सुकुमार ने चेन्नई के ग्रीनवेज रोड स्थित ईपीएस (EPS) के आधिकारिक आवास पर जाकर उनसे औपचारिक मुलाकात की। इस मुलाकात को तमिलनाडु के राजनीतिक विश्लेषक बागी खेमे में बड़ी दरार और पलानीस्वामी के नेतृत्व की मजबूती के तौर पर देख रहे हैं। एक तरफ जहां तीन विधायक पूरी तरह से छिटक कर सत्ता पक्ष की ओर चले गए हैं, वहीं दूसरी तरफ ईपीएस ने अपने डैमेज कंट्रोल तंत्र को सक्रिय कर बाकी बागी विधायकों की घर-वापसी कराकर विपक्षी खेमे को बिखरने से बचा लिया है।