क्या NDA में होगा बड़ा विस्तार? परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के बीच DMK, NCP और अकाली दल के साथ आने की सुगबुगाहट
नई दिल्ली: संसद में आगामी परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण विधेयक जैसे ऐतिहासिक व संविधान संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को लेकर केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को मजबूत संख्याबल की आवश्यकता है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन विधेयकों को पारित कराने के लिए एनडीए के कुनबे का विस्तार होगा? क्या तमिलनाडु में डीएमके और बीजेपी करीब आ रहे हैं? क्या महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़ों का एकीकरण होने जा रहा है? और क्या पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन करेगा? ये सवाल इसलिए प्रासंगिक हैं क्योंकि इन दलों का साथ एनडीए को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के करीब लाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
☕ स्पीकर की चाय पार्टी में विपक्ष से इतर कनिमोझी की मौजूदगी, PM मोदी से हुई बातचीत
तमिलनाडु के सियासी परिदृश्य में आए बदलावों के बाद डीएमके अपने भविष्य और संगठनात्मक मजबूती के नफे-नुकसान का निरंतर आकलन कर रही है।
इसी बीच, संसद के सत्र समापन पर लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का जब अधिकांश विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया, तब डीएमके ने विपक्ष की परवाह किए बिना अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। डीएमके सांसद कनिमोझी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनडीए के शीर्ष नेताओं से सौहार्दपूर्ण संवाद किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य की राजनीति से परे डीएमके केंद्र की सत्ता के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना चाहती है, जो परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के लिए उपयोगी हो सकता है।
🤝 क्या NDA को मिलेगा DMK का समर्थन? 30 सांसदों का संख्याबल बेहद अहम
डीएमके के पास लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 30 सांसदों का एक मजबूत संख्याबल है।
यदि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व में सहमति बनती है, तो डीएमके के एनडीए में शामिल होने अथवा बाहर से ‘मुद्दा-आधारित समर्थन’ (Issue-based Support) देने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। पार्टी के भीतर एक वर्ग का मानना है कि केंद्र सरकार को रचनात्मक मुद्दों पर समर्थन देकर राज्य के विकास और पार्टी के अस्तित्व को सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं, बीजेपी का एक खेमा भी क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए इस तरह के राजनीतिक तालमेल को सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है।
⚡ महाराष्ट्र में NCP का एकीकरण: मोदी कैबिनेट विस्तार में मिल सकती है जगह
महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े समीकरण बदलने की हलचल तेज हो गई है।
एनसीपी के दोनों धड़ों के एकीकरण को लेकर चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों धड़ों के विलय के पश्चात एकीकृत एनसीपी एनडीए का पूर्ण हिस्सा बन सकती है और केंद्र सरकार में भी भागीदार हो सकती है। संसद सत्र के दौरान वरिष्ठ नेताओं की प्रधानमंत्री से हुई मुलाकातों के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में एकीकृत एनसीपी को दो मंत्री पद मिल सकते हैं, जिसमें कृषि और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर जोर दिया जा रहा है।
🌾 पंजाब चुनाव और शिरोमणि अकाली दल: पुराने सहयोगियों के फिर साथ आने की चर्चा
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शिरोमणि अकाली दल (SAD) और बीजेपी के पुनर्मिलन की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री मोदी से हालिया मुलाकातों और शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद ने इन अटकलों को और हवा दी है। नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के उपरांत प्रधानमंत्री सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सांसद हरसिमरत कौर बादल से संपर्क कर कुशलक्षेम जाना, जिससे दोनों दलों के बीच राजनीतिक संवाद और सुदृढ़ हुआ है। भले ही संसद में अकाली दल का संख्याबल सीमित हो, लेकिन पंजाब की जमीनी राजनीति में दोनों का गठबंधन दोनों दलों के लिए दूरगामी लाभ का सौदा साबित हो सकता है।