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एकतरफा दिख रहे नंदीग्राम उपचुनाव का माहौल अब बदल गया

ममता बनर्जी ने कांग्रेस का समर्थन कर दिया

टीएमसी प्रत्याशी मैदान छोड़ गयी थी

बदले परिवेश में नया दांव खेला गया

कांग्रेस प्रत्याशी भी गिरफ्तार किया गया

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया जाना दशकों पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में एक चौंकाने वाला मोड़ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपने सबसे गहरे संगठनात्मक संकट से जूझ रही है, और यह बंगाल में विपक्षी राजनीति के नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।

ममता बनर्जी द्वारा मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा, उनके अपने गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ कोलकाता में हुई बैठक के बाद 6 अक्टूबर के चुनाव से हटने के कुछ ही घंटों बाद आई। इस बीच, चुनाव आयोग ने आंतरिक पार्टी विवाद के चलते टीएमसी के पारंपरिक नाम और जोड़ा घास फूल प्रतीक को फ्रीज कर दिया है और नंदीग्राम तथा रेजिनगर के उपचुनावों के लिए ममता के गुट व उनके बागी धड़े को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं।

18 सितंबर को कांग्रेस को सिस्टर पार्टी और प्राकृतिक सहयोगी बताते हुए ममता ने कहा कि यह निर्णय देश के व्यापक हित में और इंडिया गठबंधन को मजबूत करने के लिए लिया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम एंटी-बीजेपी वोटों के विभाजन को रोकने का एक प्रयास है, खासकर तब जब उनका गुट एक असाधारण रूप से कठिन दौर से गुजर रहा है। घोषणा के तुरंत बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जिसके बाद इस विकास को और अधिक राजनीतिक तूल मिल गया है।

ममता बनर्जी खुद कांग्रेस से ही अलग होकर 1990 के दशक के अंत में टीएमसी की स्थापना करने वाली नेता रही हैं। हालांकि, संकट के समय दोनों दल अतीत में भी कई बार साथ आए हैं—चाहे वह 2001 का विधानसभा चुनाव हो या 2009 के लोकसभा चुनाव, जिसके बाद 2011 में दोनों ने मिलकर वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को समाप्त किया था। बाद के वर्षों में मतभेद बढ़ने के कारण दूरियां आ गईं, लेकिन यह ताजा घटनाक्रम बंगाल में एक नई राजनीतिक दिशा तय कर सकता है।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसे ममता की राजनीतिक मजबूरी बताया, वहीं पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इस समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि यह बदलाव विपक्ष के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टचार्य ने इस गठबंधन को खारिज करते हुए कहा कि शून्य में शून्य जोड़ने से परिणाम शून्य ही रहता है।