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प्लाजा सिनेमा, गौरवशाली अतीत से असामाजिकता के अड्डे तक का सफर

दिन से रात तक नशे का अड्डा और बहुत कुछ

  • नवीन जयसवाल के पास है अधिकार

  • स्वामित्व क्लब का और कानूनी पेंच

  • असामाजिक तत्वों और नशे का गढ़

राष्ट्रीय खबर

रांचीः राँची के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक प्लाजा सिनेमा हॉल, जो कभी शहर की सांस्कृतिक पहचान हुआ करता था, आज अपनी बदहाली और असामाजिक गतिविधियों के कारण स्थानीय निवासियों के लिए सिरदर्द बन गया है। इस सिनेमा हॉल के बंद होने और इसके वर्तमान स्वरूप को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राँची का पुराना प्लाजा सिनेमा हॉल पिछले काफी समय से बंद पड़ा है। इस हॉल के संचालन की जिम्मेदारी वर्तमान में हटिया निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा विधायक नवीन जयसवाल के पास है। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, सिनेमा हॉल पर विभिन्न प्रकार के करों का बकाया काफी बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इसी बड़ी देनदारी और वित्तीय बोझ से बचने के लिए विधायक नवीन जयसवाल इसके दोबारा संचालन या रखरखाव में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि प्लाजा हॉल का वास्तविक स्वामित्व राँची के प्रतिष्ठित यूनियन क्लब के पास है। हालांकि, यूनियन क्लब के पदाधिकारी चाहकर भी इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण एग्रीमेंट (करार) की अवधि का शेष होना बताया जा रहा है। कानूनी बाध्यताओं के चलते क्लब प्रबंधन फिलहाल इस संपत्ति को अपने नियंत्रण में लेकर इसकी स्थिति सुधारने में असमर्थ है, जिसका फायदा उठाकर भवन को लावारिस छोड़ दिया गया है।

सिनेमा हॉल के लगातार बंद रहने और देखरेख के अभाव ने इसे असामाजिक तत्वों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बना दिया है। स्थानीय लोगों की मानें तो अब यह स्थान नशे के कारोबार से जुड़े लोगों का नियमित अड्डा बन चुका है। यहाँ न केवल नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री होती है, बल्कि नशा करने वाले युवक-युवतियों का जमावड़ा भी आम बात हो गई है।

मुहल्ले के लोगों का कहना है कि यहाँ आने वाले अधिकांश चेहरे अपरिचित होते हैं और बाहरी क्षेत्रों से आते हैं। रात होते ही इस परिसर का माहौल बेहद असुरक्षित और अनैतिक हो जाता है। इसका प्रभाव केवल सिनेमा हॉल की चहारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यूनियन क्लब के उत्तर दिशा में स्थित खुले मैदान तक भी फैल गया है। देर शाम के बाद वहाँ से गुजरना स्थानीय महिलाओं और बच्चों के लिए दूभर हो गया है।

सड़क के किनारे स्थित इतनी कीमती संपत्ति का इस प्रकार दुरुपयोग होना न केवल राजस्व की हानि है, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस भवन के भविष्य को लेकर जल्द निर्णय लिया जाए और यहाँ बढ़ रही असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।