ड्रोन तकनीक के युद्ध में ब्रिटिश सेना का नया प्रयास
कठिन इलाकों में पहुंचना आसान
जहां भारी वाहन से जाना कठिन
अमेरिका के पास ऐसी सेना है
लंदनः आधुनिक युद्धक्षेत्र की बदलती रणनीतिक आवश्यकताओं और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, ब्रिटिश सेना ने सैन्य अभियानों में घोड़ों की उपयोगिता को पुनर्जीवित करने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अभूतपूर्व और अनूठा कदम उठाया है।
वर्तमान रक्षा परिदृश्य में, जहाँ उन्नत तकनीक और पारंपरिक युद्ध कौशल का समन्वय सामरिक श्रेष्ठता का एक नया पैमाना बन रहा है, ब्रिटेन की प्रतिष्ठित हाउसहोल्ड कैवलरी माउंटेड रेजिमेंट ने घोड़ों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए अत्याधुनिक कैमफ्लेज (छलावरण) पैटर्न विकसित किए हैं। इन विशेष कैमो पैटर्नों का मुख्य उद्देश्य दुश्मन की उन्नत निगरानी प्रणालियों और थर्मल इमेजिनेशन से घोड़ों तथा घुड़सवार सैनिकों को पूरी तरह सुरक्षित रखना और आधुनिक सामरिक ऑपरेशंस के दौरान उनकी छिपने की तकनीकों को अभेद्य बनाना है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, ब्रिटिश सेना ने हैंपशायर में स्थित प्रसिद्ध लंगमूर ट्रेनिंग एरिया में आयोजित अपने वार्षिक समर कैंप के दौरान इन विशेष रूप से तैयार किए गए कैमफ्लेज और उन्नत घुड़सवारी कौशलों का कड़ा परीक्षण किया है। देश के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस सैन्य अभ्यास में शामिल सैनिक कई अति महत्वपूर्ण और सामरिक पहलुओं पर बारीकी से काम कर रहे हैं, जिनमें जटिल क्षेत्रों में घुड़सवार टोही अभियान चलाना, अत्यधिक दुर्गम और पथरीले इलाकों में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना, अत्याधुनिक हथियारों और ड्रोनों से लैस दुश्मन की नजरों से प्रभावी बचाव करना, दूरदराज के मोर्चों पर रसद और हथियारों की आपूर्ति करना तथा युद्ध जैसी परिस्थितियों में घोड़ों के स्वास्थ्य और उनकी देखभाल के कड़े मानक तय करना शामिल है। इस अनूठी सैन्य रणनीति को अपनाने के पीछे मुख्य प्रेरणा उन मित्र देशों और सहयोगी राष्ट्रों के अनुभवों से मिली है, जो आधुनिक दौर में भी अपने विशेष अभियानों और सामरिक गतिविधियों में घोड़ों का अत्यंत सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं।
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने इस बात को विशेष रूप से स्पष्ट किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने 9/11 के ऐतिहासिक आतंकवादी हमलों के बाद से ही दुनिया के सबसे कठिन, पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सैनिकों की त्वरित तैनाती के लिए एक विशेष अभियान दल के रूप में घोड़ों और पैक-हॉर्स की पारंपरिक क्षमता को पूरी तरह जीवित और सक्रिय रखा है।
इसका सबसे बड़ा ऐतिहासिक उदाहरण वर्ष 2001 में देखने को मिला था, जब अमेरिकी विशेष बलों ने अफगानिस्तान के जटिल और पर्वतीय इलाकों में तालिबान के खिलाफ चलाए गए भीषण अभियानों के दौरान इसी पारंपरिक युद्ध कौशल और घुड़सवार सेना का अत्यधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करके रणनीतिक बढ़त हासिल की थी। आधुनिक तकनीकी हथियारों और पारंपरिक घुड़सवार सेना के इस अनूठे व सामंजस्यपूर्ण समन्वय का मूल उद्देश्य भविष्य के संभावित सैन्य संघर्षों में एक निर्णायक सामरिक बढ़त हासिल करना है, विशेष रूप से उन दुर्गम भूभागों और जंगलों में जहां भारी भरकम और पारंपरिक सैन्य वाहन या आधुनिक बख्तरबंद गाड़ियां आसानी से नहीं पहुंच सकतीं।