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जबरन हराया गया इस्तीफा का सवाल नहीः ममता बनर्जी

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रेस से बातचीत की

  • चुनाव आयोग भाजपा का एजेंट बना है

  • ताकत के दम पर दबायेंगे तो विरोध

  • मैं बहुत सरल जीवन ही जीती हूं

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के चौंकाने वाले परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। मंगलवार, 5 मई 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने चुनाव परिणामों को जनमत मानने से इनकार करते हुए इसे एक गहरी साजिश का परिणाम बताया। ममता बनर्जी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि इस चुनाव में उनकी लड़ाई भाजपा से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से थी, जिसने भाजपा के एजेंट के रूप में काम किया।

ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा, अगर उन्हें लगता है कि वे ताकत के दम पर जीत जाएंगे और मैं जाकर इस्तीफा दे दूंगी, तो ऐसा नहीं होने वाला है। हम चुनाव नहीं हारे हैं, बल्कि हमें जबरन हराया गया है। आधिकारिक तौर पर वे चुनाव आयोग के जरिए हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से मैं कह रही हूं कि जीत हमारी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी के कार्यालयों को निशाना बनाया गया और उन पर कब्जा कर लिया गया है। यहाँ तक कि पार्टी मुख्यालय और अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर भी पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं।

दूसरी ओर, ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। भाजपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पश्चिम बंगाल में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इसके साथ ही असम में भी जीत बरकरार रखते हुए जे.पी. नड्डा को वहां का पर्यवेक्षक बनाया गया है। चुनावी सरगर्मी के बीच दक्षिण भारत से भी बड़ी खबर आई, जहाँ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चुनाव में हार स्वीकार करते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

ममता बनर्जी ने भावुक होते हुए कहा, मुझे कुर्सी की परवाह नहीं है, मुझे केवल जनता की चिंता है। मैं एक सामान्य व्यक्ति के रूप में जीना चाहती हूं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि उनके पास पर्याप्त निर्वाचित सदस्य हैं और हिंसा या डराने-धमकाने की राजनीति सफल नहीं होगी। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल अब सरकार गठन की दिशा में बढ़ रहे हैं, लेकिन बंगाल में ममता बनर्जी के कड़े रुख ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।