Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Haryana News: मानवाधिकार आयोग का कड़ा फैसला; हरियाणा के हर जिले में सरकारी शव वाहन अनिवार्य, सरकार क... Panipat News: पानीपत में शर्मनाक! आपत्तिजनक वीडियो बनाकर सालों से रेप कर रहा था एक्स बॉयफ्रेंड; पति ... Crime News: पार्टी से लौटे युवक की खेत में मिली लाश; हत्या या आत्महत्या? गुत्थी सुलझाने में जुटी पुल... सत्ता का दुरुपयोग करने वालों के लिए सबक: खेड़ा Panchkula Police Action: दिल्ली से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क का भंडाफोड़; लाखों की ठगी करने वाल... तृणमूल कांग्रेस की चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका खारिज देश भर के अधिकांश मोबाइलों में बजा सायरन बंगाल के चौबीस परगना की दो सीटों पर दोबारा वोट विरोध और उकसावे के बीच बड़ा अंतर होता है भाजपा का दांव अब भाजपा पर आजमा रही है आप

तृणमूल कांग्रेस की चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका खारिज

आगे किसी आदेश की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट

  • अदालती कार्यवाही और टिप्पणी

  • चुनाव आयोग ने नियम बताये

  • पहले के परिपत्र को ही लागू किया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर कोई भी नया आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने केवल इस बात को दोहराया कि भारत निर्वाचन आयोग के वकील द्वारा दिए गए बयान के अनुसार, संबंधित परिपत्र को पूरी तरह लागू किया जाएगा।

न्यायालय ने चुनाव आयोग के उस आश्वासन को दर्ज किया जिसमें कहा गया था कि वे 13 अप्रैल के अपने परिपत्र का पालन करेंगे। टीएमसी के दावों के अनुसार, इस परिपत्र में मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रावधान शामिल है।

यह याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने पहले मतगणना व्यवस्था को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की विशेष पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। गौरतलब है कि मतों की गिनती 4 मई को होनी निर्धारित है।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने टिप्पणी की कि मतगणना के समय सभी दलों के प्रतिनिधि वहां मौजूद रहेंगे और चुनाव आयोग का परिपत्र नियमों के विपरीत नहीं है। न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि मतगणना अधिकारी को केंद्र सरकार का नामांकित व्यक्ति कहना विशेष मायने नहीं रखता और ऐसे निर्णय चुनाव आयोग की संतुष्टि के दायरे में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया में माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में पहले से ही केंद्र सरकार के अधिकारी शामिल होते हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मीनाक्षी अरोड़ा पेश हुए। उन्होंने आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें 13 अप्रैल के परिपत्र की जानकारी 29 अप्रैल को मिली। उन्होंने आयोग द्वारा किसी भी गड़बड़ी की आशंका के आधार पर भी सवाल उठाए।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने तर्क दिया कि रिटर्निंग ऑफिसर, जो कि एक राज्य सरकार का कर्मचारी होता है, पूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण रखता है और कर्मियों का चयन करता है। उन्होंने बताया कि मतगणना के लिए एक राज्य सरकार का कर्मचारी और एक केंद्र सरकार का कर्मचारी क्रमशः पर्यवेक्षक और सहायक के रूप में नियुक्त किए जाएंगे। आयोग ने कहा कि याचिकाकर्ता की चिंताएं गलत धारणाओं पर आधारित हैं।