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आप नेताओं के लिए एमिकस क्यूरी का फैसला

दिल्ली आबकारी नीति का मामला अब और उलझा

  • नेताओँ ने कर दिया है वहिष्कार

  • मामला से हटने से किया है इंकार

  • तीनों के लिए अलग अलग वकील

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में एक नया मोड़ आया है। आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं—अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया और दुर्गेश पाठक—द्वारा अदालत की कार्यवाही के बहिष्कार के फैसले के बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अब उनके पक्ष की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी (अदालत का मित्र) नियुक्त करने का निर्णय लिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि चूंकि ये तीनों नेता न तो स्वयं उपस्थित हो रहे हैं और न ही किसी वकील के माध्यम से अपना पक्ष रख रहे हैं, इसलिए अदालत की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ वकीलों की नियुक्ति आवश्यक है।

यह विवाद तब गहराया जब न्यायमूर्ति शर्मा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने के इन नेताओं के अनुरोध को ठुकरा दिया। इसके विरोध में केजरीवाल और अन्य नेताओं ने जज को पत्र लिखकर सूचित किया कि वे अब इस अदालत की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे और महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करेंगे। उन्होंने न्यायाधीश पर वैचारिक झुकाव और हितों के टकराव का आरोप लगाया था, जिसे अदालत ने आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया।

दरअसल, मामला सीबीआई की उस पुनर्विचार याचिका से जुड़ा है, जिसमें फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और सिसौदिया सहित 23 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। निचली अदालत ने सीबीआई की जांच की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि मामला न्यायिक जांच के लायक नहीं है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने मार्च में प्रारंभिक टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण बताया था।

न्यायमूर्ति शर्मा ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा, मैं प्रतिवादियों (केजरीवाल, सिसौदिया और पाठक) के लिए तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त करूंगी। उसके बाद ही सीबीआई की दलीलों को विस्तार से सुना जाएगा। अदालत इस संबंध में औपचारिक आदेश शुक्रवार (8 मई) को पारित करेगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने अदालत के इस कदम का समर्थन किया ताकि मामले की कानूनी पेचीदगियों को तटस्थ दृष्टिकोण से समझा जा सके। आगामी शुक्रवार को नियुक्त होने वाले ये एमिकस क्यूरी इस बात पर बहस करेंगे कि क्या ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को आरोप तय होने से पहले बरी करना कानूनन सही था।